ईरान युद्ध के बीच रूस ने भारत के लिए अपनी बाहें फैला दी हैं. वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल को देखते हुए रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वह कच्चे तेल और नेचुरल गैस की सप्लाई बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है. रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव ने दिल्ली दौरे के दौरान साफ कर दिया कि उनकी कंपनियां भारतीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने को तैयार हैं, ताकि युद्ध के इस दौर में भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई आंच न आए.
रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा रखी है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते में पैदा हुई बाधाओं ने भारत की चिंता बढ़ा दी थी, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से मंगवाता है. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी संकरे रास्ते से गुजरता है, लेकिन अब रूस एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है. रूस ने संकेत दिया है कि अगर खाड़ी देशों से सप्लाई में दिक्कत आती है, तो वह इसकी भरपाई करने में पीछे नहीं हटेगा.
इन्वेस्टमेंट बढ़ाने पर फोकस
भारत दौरे पर आए रूसी नेता मंतुरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ लंबी बातचीत की. इस दौरान सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का खाका खींचा गया. दोनों पक्षों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद आपसी व्यापार और निवेश को बढ़ाया जा सकता है. रूस ने भारत के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का वादा किया है.
खाद की सप्लाई भी बढ़ाएंगे
ऊर्जा के अलावा खेती-किसानी के मोर्चे पर भी रूस भारत का बड़ा मददगार साबित हो रहा है. रूसी अधिकारियों ने जानकारी दी है कि भारत को खाद की सप्लाई में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और 2025 के अंत तक इसमें 40 प्रतिशत तक का उछाल देखा गया है. रूस ने स्पष्ट किया है कि वह भारत की खाद की मांग को लगातार पूरा करता रहेगा, ताकि भारतीय किसानों को किसी भी तरह की किल्लत का सामना न करना पड़े. यह सहयोग दोनों देशों के बीच रोटी और ऊर्जा के गहरे रिश्ते को दर्शाता है.
व्यापार 100 अरब ले जाने का प्लान
भारत और रूस के बीच यह बातचीत उस पुराने लक्ष्य को पाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें दोनों देशों ने साल 2030 तक अपने व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का संकल्प लिया है. पिछले साल दिसंबर में पुतिन और मोदी की मुलाकात के दौरान जो रोडमैप तैयार किया गया था, उस पर अब तेजी से काम शुरू हो गया है. इसमें न केवल व्यापार, बल्कि नई तकनीक, इनोवेशन और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी मिलकर काम करने पर सहमति बनी है.
भारत रूस और करीब आए
इस हाई-लेवल मीटिंग में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा हुई. रूस ने कहा है कि वह भारत के साथ सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की बड़ी संभावनाएं देखता है. कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट के संकट ने भारत और रूस को और करीब ला दिया है. जहां एक तरफ दुनिया जंग के साये में है, वहीं भारत और रूस अपनी दोस्ती को ‘प्लान-बी’ के तौर पर इस्तेमाल कर देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने में जुटे हैं.




