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Rare Bird in Barmer : बाड़मेर के सेतरावा गांव में दुर्लभ युरेशियन बिटर्न घायल अवस्था में मिला. अपनी बूमिंग आवाज और शर्मीले स्वभाव के लिए प्रसिद्ध इस पक्षी को ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित पकड़ा और प्राथमिक उपचार दिया. अब पक्षी पूरी तरह स्वस्थ होकर जल्द ही अपने प्राकृतिक आवास में लौटेगा, वन्यजीव संरक्षण में प्रेरणादायक पहल साबित हुई.
बाड़मेर : सरहदी बाड़मेर जिले के सेतरावा गांव में उस वक्त हैरानी का माहौल बन गया जब रेत के समंदर के बीच दलदली इलाकों में रहने वाला दुर्लभ पक्षी युरेशियन बिटर्न घायल अवस्था में मिला. अपनी रहस्यमयी “बूमिंग” आवाज और शर्मीले स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले इस पक्षी का सफल रेस्क्यू किया गया है.
बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित सेतरावा गांव में ग्रामीणों को एक अनोखा पक्षी घायल और बेहद कमजोर हालत में दिखाई दिया. पक्षी उड़ने में असमर्थ था और जमीन पर ही पड़ा हुआ था. ग्रामीण मनोज कुमार धनदे ने इसकी सूचना कोबरामैन मुकेश माली को दी. जिसके बाद मुकेश माली और पशुधन निरीक्षक रवि कुमार जांगिड़ की टीम मौके पर पहुंची.
शर्मिला पक्षी होने के साथ ही आवाज की वजह से अलग पहचान रखता है यूरेशियन बिटर्न
रेस्क्यू टीम ने पक्षी को सुरक्षित तरीके से पकड़ा और प्राथमिक उपचार दिया. प्राथमिक उपचार करने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ है. टीम ने युरेशियन बिटर्न का रेस्क्यू कर वन विभाग को सूचना दी है. कोबरामैन मुकेश माली के मुताबिक यूरेशियन बिर्टन सामान्यतः दलदली क्षेत्रों, झीलों और घने सरकंडों में पाया जाता है. यह पक्षी इतना शर्मीला होता है कि आसानी से नजर नहीं आता है और खतरा महसूस होने पर बिल्कुल स्थिर हो जाता है जिससे वह आसपास के वातावरण में छिप जाता है.
बुमिंग आवाज है अनूठी पहचान, बाड़मेर जैसे इलाके में मिलना दुर्लभ माना जा रहा
पशुधन निरीक्षक रवि जांगिड़ के मुताबिक इसकी सबसे अनोखी पहचान इसकी गहरी और गूंजदार “बूमिंग” आवाज है जो दूर-दूर तक सुनाई देती है और इसे अन्य पक्षियों से अलग बनाती है. भारत में यह पक्षी ज्यादातर झीलों, तालाबों और वेटलैंड्स में देखा जाता है इसलिए बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी इलाके में इसका मिलना बेहद दुर्लभ माना जा रहा है.
पहले भी मुकेश माली और उनकी टीम कर चुकी कई दुलर्भ पक्षियों का रेस्क्यू
मुकेश माली और उनकी टीम का कहना है कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद इस पक्षी को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा. आपको बता दे कि मुकेश माली और रवि कुमार जांगिड़ की टीम पहले भी क्षेत्र में सैकड़ों पशु-पक्षियों का सफल रेस्क्यू कर चुकी है और उनका यह कार्य वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रेरणादायक है.
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