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Budget Allocation in Delhi : दिल्ली सरकार ने शहर की कॉलोनियों में झूलते बिजली के तारों को अंडर ग्राउंड करने के लिए बजट में आवंटन बढ़ा दिया है. सरकार ने अगले वित्तवर्ष के लिए 200 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. इससे पहले के वित्तवर्ष में सरकार ने इसके लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया था. बजट में सरकार ने कहा है कि चांदनी चौक में भी बिजली की तारों को अंडरग्राउंड करने का काम शुरू कर दिया गया है.
दिल्ली सरकार ने बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने के लिए 200 करोड़ दिए हैं.
नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में अब लक्ष्मी नगर जैसे इलाकों की गलियों में झूलते हुए बिजली की तारों का जाल नहीं दिखेगा. दिल्ली की मौजूदा सरकार ने इस समस्या की तरफ ध्यान दिया है और ऐसा पहली बार होगा जब इन कॉलोनियों को बिजली के तारों से खतरों से मुक्ति मिलेगी. दिल्ली सरकार के मंगलवार को पेश वित्तवर्ष 2026-27 के बजट में बिजली विभाग के लिए 3,942 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इसमें बिजली सब्सिडी के लिए 3,500 करोड़ रुपये और हवा में झूलते बिजली की तारों को भूमिगत करने (जमीन के नीचे बिछाने) के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है.
दिल्ली सरकार ने अपने बजट में ऊर्जा की बचत एवं संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘दिल्ली ऊर्जा संरक्षण कोष’ बनाने का भी प्रस्ताव दिया गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट भाषण में कहा कि बिजली विभाग के लिए आवंटित 3,942 करोड़ रुपये से न केवल बिजली सब्सिडी जारी रहेगी, बल्कि हम ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली प्रोत्साहन योजनाओं के जरिये दिल्ली को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएंगे. इस दिशा में तेजी से काम करने के लिए बाकायदा कार्ययोजना तैयार की जाएगी.
बिजली की तारों से नहीं होंगे हादसे
दिल्ली सरकार ने उच्च वोल्टेज (हाई-टेंशन) और कम वोल्टेज (लो-टेंशन) वाली बिजली की तारों को भूमिगत करने के लिए बजट को दोगुना कर दिया है. वित्तवर्ष 2025-26 में इसके लिए 100 करोड़ रुपये रखे गए थे जिसे 2026-27 के बजट में बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है. पिछले साल बिजली विभाग का कुल बजट 3,847 करोड़ रुपये था. इसमें भी करीब 100 करोड़ रुपये का इजाफा किया गया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





