लिफ्ट और दीवार के बीच 1 घंटे फंसा रहा शख्स, फट गया दिल और कलेजा, आरजी कर में एक और कांड, 5 गिरफ्तार

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कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में एक और दर्दनाक हादसा हुआ है, जिसमें 40 वर्षीय अरूप बनर्जी की लिफ्ट में फंसकर मौत हो गई. पुलिस ने इस मामले में तीन लिफ्ट ऑपरेटर और दो सुरक्षा गार्ड को गिरफ्तार किया है.

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ‘जन सुविधा के लिए बनी मशीन को मौत का जरिया बना दिया.’ यह घटना शुक्रवार सुबह की है, जब एक खराब लिफ्ट के बीच फंसकर बनर्जी की जान चली गई.

आरोपियों की पहचान

इस मामले में तीन लिफ्ट ऑपरेटर 49 वर्षीय मिलन कुमार दास, 48 साल के बिस्वनाथ दास और 55 साल के मानस कुमार गुहा के अलावा दो सुरक्षा गार्ड अशरफुल रहमान (31 साल) और शुभदीप दास (25) को गिरफ्तार किया गया है. शनिवार को सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

क्या है पूरा मामला?

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की लिफ्ट में अरूप फंस गया था और एक घंटे से अधिक समय बाद उसका शव वहां से बरामद किया गया. मृतक के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों का पता चला है, जिनमें पसलियों, हाथों और पैरों में फ्रैक्चर के साथ-साथ फेफड़ों, दिल और कलेजे (लिवर) फट हुए पाए गए.

आरोप है कि जब अरुप एक घंटे से अधिक समय तक बीच में फंसी लिफ्ट में फंसे रहे, तब उस दौरान कोई लिफ्ट ऑपरेटर मौजूद नहीं था. इस दौरान लिफ्ट को दोबारा चालू करने के लिए अस्पताल का कोई कर्मचारी या लिफ्ट ऑपरेटर भी उपलब्ध नहीं था.

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, सप्तर्षि चट्टोपाध्याय ने मीडियाकर्मियों को बताया कि अरूप के पिता की तरफ से अस्पताल अधिकारियों के पास दर्ज कराई गई शिकायत को ताला पुलिस स्टेशन भेज दिया गया है.

चट्टोपाध्याय ने बताया कि मृतक के परिवार वालों का आरोप है कि लिफ्ट में फंसने के बाद उन्हें चोट लगी. लिफ्ट ठीक से चल रही थी. एक बटन दबाया गया, जिसके बाद लिफ्ट ऊपर-नीचे चलने लगी. वे घबरा गए. मृतक के परिवार के सदस्य के अनुसार, लिफ्ट फिर एक जगह पर रुक गई. अंदर फंसे तीनों लोग बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, लेकिन लिफ्ट के बाहर एक फोल्डिंग गेट था. उसी समय, मृतक ने लिफ्ट से बाहर निकलने की कोशिश की, तभी लिफ्ट फिर से ऊपर जाने लगी. उसी दौरान, मृतक लिफ्ट और दीवार के बीच फंस गए.

पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस जांच में सामने आया कि हादसे के समय लिफ्ट ऑपरेटर मौके पर मौजूद नहीं थे. वहीं सुरक्षा गार्डों पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ित की मदद करने के बजाय लापरवाही बरती.

अभियोजन पक्ष के वकील अरिंदम चट्टोपाध्याय ने अदालत में कहा कि गार्डों को लिफ्ट बंद रखनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया. मृतक के परिजनों के वकीलों का कहना है कि इस घटना में और भी लोग जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनकी जांच की जानी चाहिए.



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