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Kolkata Lift Accident: महानगरों के साथ ही छोटे-छोटे शहरों में भी अब लिफ्ट का प्रचलन बढ़ गया है. बहुमंजिला इमरातों के लिए लिफ्ट या एलिवेटर का होना जरूरी भी है, नहीं तो खासकर बच्चें और बुजुर्गों के लिए ऊपरी मंजिल तक जाना काफी मुश्किल हो जाएगा. लिफ्ट की सुरक्षा और मेंटेनेंस भी काफी जरूरी है.
कोलकाता में लिफ्ट दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई. (सांकेतिक तस्वीर)
कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. महानगर के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जब लिफ्ट में खराबी आने के बाद वह दीवार और लिफ्ट के बीच फंस गया. मृतक की पहचान अरूप बंद्योपाध्याय के रूप में हुई है. इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद कोलकाता पुलिस ने मामले में पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. मृतक के पिता द्वारा ताला थाने में जनरल डायरी दर्ज कराने के बाद पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. अफसरों ने बताया कि अरूप बंद्योपाध्याय करीब एक घंटे से अधिक समय तक लिफ्ट में फंसे रहे, जिसके बाद उनका शव बाहर निकाला गया. प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक की पसलियां, हाथ और पैर में कई फ्रैक्चर थे, जबकि फेफड़े, दिल और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग भी क्षतिग्रस्त पाए गए.
परिजनों का गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि घटना के समय वहां कोई लिफ्ट ऑपरेटर या सहायक स्टाफ मौजूद नहीं था, जिससे समय पर मदद नहीं मिल सकी. बताया जा रहा है कि लिफ्ट बीच में रुक गई थी और अंदर फंसे लोग लंबे समय तक बिना सहायता के रहे. अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक सप्तर्षी चट्टोपाध्याय ने कहा कि परिजनों की शिकायत पुलिस को सौंप दी गई है. उन्होंने बताया कि परिजनों के अनुसार, लिफ्ट के अचानक ऊपर-नीचे होने से घबराहट की स्थिति बन गई थी. जब लिफ्ट एक स्तर पर रुकी तो अंदर फंसे तीन लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन बाहर एक कोलैप्सिबल गेट था. इसी दौरान अरूप जैसे ही बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे, लिफ्ट अचानक ऊपर चलने लगी और वह दीवार और लिफ्ट के बीच फंस गए.
प्रशासनिक चूक
चट्टोपाध्याय ने यह भी स्वीकार किया कि घटना के समय ऑपरेटर या सहायक स्टाफ का मौजूद न होना एक प्रशासनिक चूक है. गौरतलब है कि यह अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है. अगस्त 2024 में यहां एक महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था. इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की भी जांच चल रही है. इस मामले में पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को CBI ने गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. ताजा घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं. स्थानीय लोगों और परिजनों ने जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें




