मदुरै: एक छोटी सी मानवीय खता और उस पर खाकी का ऐसा खूनी तांडव, जिसने इंसानियत को ही शर्मसार कर दिया. जब 2020 के लॉकडाउन में जयराज और बेनिक्स ने अपनी दुकान महज चंद मिनट देरी से बंद की थी तो किसी ने नहीं सोचा था कि कानून के रखवाले ही उनके लिए यमदूत बन जाएंगे. लेकिन आज मदुरै की अदालत ने उन 9 वर्दीधारी जल्लादों के घमंड को मिट्टी में मिलाते हुए न केवल उनके फांसी के फंदे पर जाने का रास्ता साफ किया बल्कि एक ऐसा आदेश भी दे डाला जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया. पहले मौत की सजा और फिर उन कातिल पुलिसवालों की सैलरी स्लिप और प्रॉपर्टी डिटेल तलब करना. यह जज का वो सीधा प्रहार था जो बताता है कि अब इन गुनाहगारों को न सिर्फ अपनी जान देकर बल्कि अपनी पाई-पाई से उस मासूम खून का कर्ज चुकाना होगा. यह महज एक कानूनी फैसला नहीं बल्कि उन चीखों का हिसाब है जो उस रात सांतनकुलम थाने की दीवारों में दफन हो गई थीं.
प्रॉपर्टी डिटेल और सैलरी स्लिप क्यों मांगी गई?
आमतौर पर आपराधिक मामलों में सजा सुनाते समय कोर्ट संपत्ति का ब्यौरा नहीं मांगता लेकिन इस मामले में कोर्ट ने एक ठोस कानूनी रणनीति अपनाई:
· भारी भरकम जुर्माना और मुआवजा: कोर्ट ने दोषियों पर कुल 1.40 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है जो मुआवजे के रूप में पीड़ित परिवार को दिया जाना है. यह राशि दोषियों की संपत्ति और उनके वेतन की क्षमता के आधार पर तय की गई है.
· सजा की गंभीरता: कोर्ट यह देखना चाहता था कि क्या इन पुलिसवालों का पिछला रिकॉर्ड और उनकी आर्थिक स्थिति उन्हें सुधरने का मौका देने लायक है या नहीं. जब यह साफ हो गया कि रक्षक ही भक्षक बन गए हैं तो कोर्ट ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर (दुर्लभतम) मामला मानते हुए फांसी की सजा दी.
· सरकारी जवाबदेही: कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से भी रिपोर्ट मांगी थी कि इन पुलिसवालों के खिलाफ कौन सी परिस्थितियां सजा को और कड़ा बनाने के लिए पर्याप्त हैं.
रक्षक ही बन गए भक्षक
सजा सुनाते समय जज ने बेहद सख्त टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बनाए रखने की थी लेकिन उन्होंने खुद कानून के खिलाफ जाकर दो ऐसे मासूमों पर बर्बरता की जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड तक नहीं था.
क्या था पूरा मामला?
· तारीख: 19 जून 2020.
· जुर्म: लॉकडाउन के दौरान दुकान 15 मिनट देरी से बंद करना.
· बर्बरता: पुलिस ने जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को हिरासत में लेकर इतनी बेरहमी से पीटा कि उनकी अंदरूनी चोटों के कारण 22 और 23 जून को मौत हो गई.
· दोषी: इंस्पेक्टर एस. श्रीधर और उनके साथ के 8 अन्य पुलिसकर्मी. (एक आरोपी की मौत पहले ही हो चुकी है).
सवाल-जवाब
कोर्ट ने पुलिसवालों की प्रॉपर्टी और सैलरी की जानकारी क्यों मांगी थी?
पीड़ित परिवार को दिए जाने वाले 1.40 करोड़ रुपये के मुआवजे की राशि का निर्धारण करने और दोषियों की आर्थिक हैसियत जांचने के लिए कोर्ट ने यह जानकारी मांगी थी.
सांतनकुलम कांड में कितने पुलिसवालों को सजा हुई है?
कुल 9 पुलिस अधिकारियों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई गई है. मामले में शामिल 10वें पुलिसकर्मी की मौत ट्रायल के दौरान हो गई थी.
क्या जयराज और बेनिक्स का कोई आपराधिक रिकॉर्ड था?
नहीं, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पिता-पुत्र का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और पुलिस ने बिना किसी ठोस वजह के उन पर जानलेवा हमला किया.





