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Harpic vs Godrej : बीते कई साल से जिस बोतल में हार्पिक अपना टॉयलेट क्लीनर बेच रहा था, अब उसी में गोदरेज ने भी बेचना शुरू कर दिया है. दोनों इस डिजाइन को अपना बता रहे और मामला हाईकोर्ट से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसमें दखल देने से इनकार कर दिया और अब कलकत्ता हाईकोर्ट में इसका मुकदमा चलाया जाएगा.
गोदरेज और हार्पिक ने बोतल के ट्रेडमार्क को लेकर कोर्ट में लड़ाई शुरू कर दी है.
नई दिल्ली. टॉयलेट क्लीनर का इस्तेमाल तो आज सभी घरों में होता है. प्रोडक्ट यूज करने के बाद आप उसकी बोतलें कूड़ेदान में फेंक देते हैं. लेकिन, इस बात की तरफ शायद ही किसी का ध्यान गया होगा कि एक कंपनी के तौर पर इस बोतल की कितनी अहमियत है. आप जिस बोतल को कचरा समझकर फेंक देते हैं, वह किसी कंपनी के लिए पहचान का मुद्दा बन सकता है. यकीन नहीं तो हार्पिक और गोदरेज की हालिया लड़ाई को ही देख लीजिए. दोनों इस बोतल पर अपने अधिकार को लेकर भिड़ गए हैं और यह लड़ाई अब सु्प्रीम कोर्ट को दरवाजे तक पहुंच गई है.
वैसे अभी तक आपको बात समझ में नहीं आई होगी तो चलिए शुरू से शुरुआत करते हैं. दरअसल, यह सारा मामला है ट्रेडमार्क और डिजाइन के कॉपीराइट का. इस विवाद की शुरुआत हुई थी कलकत्ता हाईकोर्ट से, जो अब सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंची है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इसमें दखल देने से इनकार कर दिया है और हाईकोर्ट में इसका ट्रायल शुरू करने की बात कही है. विवाद की जड़ में है टॉयलेट क्लीनर के बोतल का आकार. आपने भी ध्यान दिया होगा कि हार्पिक का टॉयलेट क्लीनर झुकी हुई गर्दन वाली बोतल के आकार में आता है और गोदरेज की Spic नाम से आ रहे टॉयलेट क्लीनर वाली बोतल का आकार भी ऐसा ही है. अब दोनों ही कंपनियां इसे अपनी-अपनी डिजाइन बता रही हैं और इसी अधिकार को लेकर सारी लड़ाई है.
क्या है विवाद का आधार
इसमें कोई दोराय नहीं कि झुकी हुई गर्दन वाली बोतल का इस्तेमाल सबसे पहले हार्पिक ने शुरू किया था, जिसकी मूल कंपनी का नाम है Reckitt Benckiser. कंपनी ने इस खास आकार वाली बोतल में साल 1984 में ही प्रोडक्ट बेचना शुरू कर दिया था. इसके बाद साल 2002 में कंपनी ने इस डिजाइन का रजिस्ट्रेशन (नंबर 191291) करा लिया था, जिसकी अवधि अब समाप्त हो चुकी है. गोदरेज का Spic नाम से आने वाला टॉयलेट क्लीनर प्रोडक्ट भी ऐसी ही डिजाइन वाले बोतल में आता है. अब हार्पिक की कंपनी ने आरोप लगाया है कि गोदरेज ने उसके बोतल की डिजाइन को कॉपी किया है, जिससे ग्राहकों में भ्रम फैल रहा है.
दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क
- Reckitt Benckiser : हार्पिक की पैरेंट कंपनी का तर्क है कि ट्रेडमार्क एक्ट 1999 के तहत भले ही रजिस्ट्रेशन की अवधि समाप्त हो जाए लेकिन बोतल के आकार का अधिकार सुरक्षित रहता है. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया जो उसने Super Smelters vs Srmb Srijan, 2009 में दिया था और इसमें कहा था कि डिजाइन का रजिस्ट्रेशन खत्म होने से ट्रेडमार्क के अधिकार नहीं खत्म हो जाते.
- Godrej : गोदरेज कंज्यूमर का तर्क है कि डिजाइन प्रोटेक्शन साल 2002 में कराया गया था और अब खत्म हो चुका है. लिहाजा बोतल का आकार अब पब्लिक डोमेन में है और आकार फंक्शनल यानी काम करने वाला होता है तो इस पर एकाधिकार नहीं बनाया जा सकता है. यह मुद्दा पहले भ्रामक विज्ञापन का था, जो अब ट्रेडमार्क का हो चुका है.
कोर्ट में अभी तक क्या हुआ
कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 25 फरवरी, 2026 को हार्पिक के पक्ष में फैसला देते हुए अंतरिम राहत दी थी. साथ ही गोदरेज को उसके समान बोतल में प्रोडक्ट बेचने से मना भी कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि ट्रेडमार्क प्रोटेक्शन बोतल के आकार पर लागू होता है. हालांकि, तीन दिन बाद ही 28 फरवरी को डिविजन बेंच ने हार्पिक के पक्ष में आए फैसले को रद्द कर दिया और गोदरेज की अपील को मंजूरी दे दी थी. बेंच ने कहा कि बोतल के आकार पर ही ट्रेडमार्क नहीं बन सकता है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी हार्पिक की अपील को खारिज कर दिया और कलकत्ता हाईकोर्ट से ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है. फिलहाल दोनों ही कंपनियां सेम डिजाइन वाली बोतल में अपने प्रोडक्ट बेच सकते हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





