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भारत ने कल्पक्कम स्थित स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के क्रिटिकल होने के साथ परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. यह अत्याधुनिक रिएक्टर अपनी खपत से अधिक ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है जो तकनीक दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे गर्व का क्षण बताते हुए वैज्ञानिकों को बधाई दी. यह उपलब्धि भारत के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी.
पीएम मोदी ने तारीफ की.
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने आज वह करिश्मा कर दिखाया है जिसने दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गजों के होश उड़ा दिए हैं. भारतीय वैज्ञानिकों ने ‘नहले पर दहला’ मारते हुए देश को उस ‘एलिट क्लब’ में खड़ा कर दिया है जिसकी जटिल तकनीक अब तक दुनिया के गिने-चुने मुट्ठी भर देशों की जागीर समझी जाती थी. कल्पक्कम के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का ‘क्रिटिकल’ की श्रेणी में आना महज एक प्रयोग नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में वो न्यूक्लियर धमाका है जो अपनी खपत से कहीं ज़्यादा ईंधन पैदा करने की ताकत रखता है. भारत ने अब थोरियम बना पाने की उपलब्धि हासिल कर ली. इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कामयाबी पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताते हुए वैज्ञानिकों के जज्बे को सलाम किया है.
अब थोरियम से बिजली बना पाएगा भारत
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में वह ‘ब्रह्मास्त्र’ हासिल कर लिया है, जिसकी तलाश देश को दशकों से थी. तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का ‘क्रिटिकल’ होना केवल एक तकनीकी सफलता नहीं है बल्कि यह भारत के विशाल थोरियम भंडार को बिजली में बदलने का ‘गोल्डन गेट’ है. पूरी दुनिया यूरेनियम के पीछे भाग रही है जिसके भंडार सीमित हैं और भारत को इसके लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है. लेकिन कुदरत ने भारत को थोरियम का दुनिया में सबसे बड़ा भंडार (करीब 25%) दिया है. चुनौती यह थी कि थोरियम से सीधे बिजली नहीं बनाई जा सकती. इसे इस्तेमाल करने के लिए ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ की जरूरत थी जिसे भारतीय वैज्ञानिकों ने अब सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है.
Today, India takes a defining step in its civil nuclear journey, advancing the second stage of its nuclear programme.
The indigenously designed and built Prototype Fast Breeder Reactor at Kalpakkam has attained criticality.
This advanced reactor, capable of producing more fuel…





