ईरान और इजरायल में बढ़ते तनाव के बीच कश्मीर घाटी से उमड़े मानवीय समर्थन के लिए ईरान ने भारत का आभार व्यक्त किया है. दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए कश्मीर के लोगों के स्वेच्छा से दिए गए दान और एकजुटता की सराहना की. दूतावास ने लिखा कि मुश्किल वक्त में कश्मीरियों की यह उदारता कभी नहीं भुलाई जाएगी. उल्लेखनीय है कि कश्मीर के शिया बहुल इलाकों में युवाओं और महिलाओं ने घर-घर जाकर नकदी, सोने के आभूषण और घरेलू सामान इकट्ठा कर ईरान के राहत कार्यों के लिए समर्पित किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ के रूप में देखा जा रहा है.
जब कश्मीरी महिलाओं ने उतार दिए अपने गहने
इस दान अभियान में सबसे भावुक और चौंकाने वाला पहलू कश्मीर की महिलाओं का योगदान रहा. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार:
· गहनों का त्याग: अनेक महिलाओं ने बिना किसी संकोच के अपने सोने के गहने और अंगूठियां दान पात्र में डाल दीं.
· तांबे के बर्तन और मवेशी: कई गरीब परिवारों ने अपने घरों के कीमती तांबे के बर्तन और यहां तक कि अपने मवेशी भी इस मानवीय मदद के लिए सौंप दिए.
· बच्चों की गुल्लक: बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक ने अपनी बचत इस नेक काम के लिए समर्पित कर दी.
सियासी और सामाजिक एकजुटता
इस मुहिम को सिर्फ आम जनता का ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों का भी साथ मिला है.
· विधायक का बड़ा कदम: बड़गाम के विधायक मुंतजिर मेहदी ने ईरान के साथ एकजुटता दिखाते हुए अपने एक महीने का वेतन राहत कार्यों के लिए दान करने का ऐलान किया.
· हैशटैग ट्रेंड: सोशल मीडिया पर #KashmirWithIran और #StandWithIran जैसे हैशटैग के साथ लोग अपनी संवेदनाएं और मदद की तस्वीरें साझा कर रहे हैं.
ईरानी दूतावास ने कहा- ‘शुक्रिया इंडिया’
कश्मीरियों के इस निस्वार्थ प्रेम को देखकर दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास भी भावुक हो उठा. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दूतावास ने लिखा:
“ईरान के लोगों के साथ खड़े होने के लिए हम कश्मीर के दयालु लोगों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं. इस मानवीय समर्थन और एकजुटता को हम कभी नहीं भूलेंगे. थैंक यू, इंडिया!”
विश्लेषण: क्यों अहम है यह मदद?
यह केवल आर्थिक मदद नहीं है बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव की अभिव्यक्ति है. कश्मीर और ईरान के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और आध्यात्मिक संबंध रहे हैं. ईरान में चल रहे संघर्ष और मुश्किल हालात के बीच कश्मीरियों का यह कदम दिखाता है कि सॉफ्ट डिप्लोमेसी और जनता के बीच का जुड़ाव किसी भी सरकारी समझौते से कहीं अधिक मजबूत होता है.
सवाल-जवाब
दान अभियान की शुरुआत कब और कहां से हुई?
यह अभियान ईद के अगले दिन रविवार को कश्मीर घाटी के शिया बहुल इलाकों में शुरू हुआ, जहां युवाओं की टोलियों ने घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा किया.
दान में मुख्य रूप से क्या-क्या चीजें मिल रही हैं?
नकदी के अलावा लोग सोने के आभूषण, तांबे के बर्तन, कीमती घरेलू सामान और यहां तक कि भेड़-बकरियां जैसे मवेशी भी दान कर रहे हैं.




