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संसद में बुधवार को विदेशी अंशदान (FCRA) और CAPF संशोधन विधेयकों को लेकर भारी हंगामा हुआ. विपक्षी दलों ने मकर द्वार पर प्रदर्शन कर एनजीओ को निशाना बनाने का आरोप लगाया। वहीं, राज्यसभा में CAPF बिल को सेलेक्ट कमेटी को न भेजने पर कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने वॉकआउट किया, हालांकि बिल पास हो गया. दूसरी ओर लोकसभा ने ‘अमरावती पुनर्गठन विधेयक’ को हरी झंडी दे दी, जिसे टीडीपी ने बड़ी जीत बताया है.
संसद में कार्यवाही हुई.
संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और भारी गहमागहमी देखने को मिली. एक ओर जहां सरकार ने अमरावती और CAPF जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन से पारित कराने में सफलता हासिल की, वहीं विपक्ष ने इन कानूनों की प्रक्रिया और प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाते हुए सदन से वॉकआउट किया. विदेशी चंदे से लेकर सुरक्षा बलों के अधिकारों तक, संसद परिसर से लेकर सदन के भीतर तक विरोध के स्वर गूंजते रहे. विपक्ष का आरोप है कि सरकार बहुमत के बल पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और अदालती आदेशों की अवहेलना कर रही है.
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विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक पर संग्राम
विपक्षी दलों ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ संसद परिसर के मकर द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया. कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और अन्य दलों के सांसदों ने हाथों में बैनर लेकर सरकार विरोधी नारेबाजी की. विपक्ष का तर्क है कि यह विधेयक असंवैधानिक है और इसका उद्देश्य एनजीओ (NGO) विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित संस्थानों को निशाना बनाकर उन्हें नष्ट करना है. कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसे संस्थाओं पर हमला करार दिया. वहीं, सरकार का कहना है कि यह संशोधन विदेशी चंदे के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है.
CAPF बिल पर राज्यसभा में हंगामा और वॉकआउट
राज्यसभा में CAPF विधेयक 2026 को लेकर विपक्ष ने कड़ा रुख अपनाया. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि इस बिल में कई खामियां हैं और इसे विस्तृत जांच के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए. विपक्षी सांसदों का कहना है कि यह बिल उन जवानों और अधिकारियों के हक को मारता है जो सीमाओं पर देश की रक्षा करते हैं. जब सरकार ने बिल को कमेटी में भेजने की मांग खारिज कर दी, तो कांग्रेस, आरजेडी, शिवसेना (UBT) और बीजेडी सहित पूरे विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया. हंगामे के बीच यह विधेयक राज्यसभा से पारित हो गया.
अमरावती पुनर्गठन विधेयक लोकसभा से पारित
आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर बहुप्रतीक्षित ‘आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026’ को लोकसभा ने विस्तृत चर्चा के बाद पारित कर दिया. इस बिल के पास होने पर आंध्र प्रदेश के लोगों में खुशी की लहर है. मंत्री नारा लोकेश कल दिल्ली में राज्यसभा की कार्यवाही के गवाह बनेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य की जनता की ओर से आभार व्यक्त करेंगे. इस विधेयक का उद्देश्य अमरावती के विकास और राज्य के पुनर्गठन से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाना है. टीडीपी और सत्ता पक्ष ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है.
जन विश्वास संशोधन विधेयक और विपक्ष के आरोप
लोकसभा में ‘जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026’ पर भी विचार किया गया. विपक्ष ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे ‘अदालत की अवमानना’ करार दिया. आरजेडी सांसद मनोज झा और शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को बहुमत के जोर पर पलटने की कोशिश कर रही है. विपक्ष का आरोप है कि सशस्त्र बलों में विभाजनकारी सोच लाई जा रही है और चर्चा के दौरान मंत्रियों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिए जा रहे हैं. इन तमाम मुद्दों पर असहमति जताते हुए विपक्षी सांसदों ने विरोध की राजनीति को सदन से सड़क तक जारी रखा.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें





