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मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के अंतर्गत बच्चों को पहले पटना के पीएमसीएच और आईजीआईसी संस्थानों में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी हृदय संबंधी विस्तृत जांच करेंगे. प्राथमिक जांच और कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिन बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता होगी, उन्हें सरकार अपने खर्च पर विमान या ट्रेन से गुजरात (अहमदाबाद) भेजेगी, ताकि उनका समुचित इलाज सुनिश्चित किया जा सके.
सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले के 26 हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के जीवन में रविवार का दिन नई उम्मीद लेकर आया. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत इन बच्चों को बेहतर इलाज के लिए जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा विशेष एंबुलेंस से पटना भेजा गया. मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के अंतर्गत बच्चों को पहले पटना के पीएमसीएच और आईजीआईसी संस्थानों में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी हृदय संबंधी विस्तृत जांच करेंगे. प्राथमिक जांच और कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिन बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता होगी, उन्हें सरकार अपने खर्च पर विमान या ट्रेन से गुजरात (अहमदाबाद) भेजेगी, ताकि उनका समुचित इलाज सुनिश्चित किया जा सके.
सरकारी खर्च पर मिलेगा विश्वस्तरीय इलाज
सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि इन बच्चों का ऑपरेशन गुजरात के प्रसिद्ध श्री सत्य साईं अस्पताल में किया जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया राज्य स्वास्थ्य समिति के सहयोग से संचालित होती है, जहां देश के अनुभवी कार्डियक सर्जन जटिल ऑपरेशन करते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घर से अस्पताल तक की यात्रा, इलाज, रहने और खाने सहित पूरी प्रक्रिया का खर्च बिहार सरकार वहन करेगी. आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि निजी अस्पतालों में ऐसे ऑपरेशन पर लाखों रुपये खर्च होते हैं. इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी बच्चे का इलाज न रुके.
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में सुरक्षित रवानगी
बच्चों की सुरक्षित यात्रा और स्वास्थ्य निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम तैनात रही. इस दौरान आयुष चिकित्सक डॉ. नीतीश कुमार, डॉ. अजीब असरार और फार्मासिस्टों की टीम ने बच्चों की नियमित जांच की. जिला समन्वयक चंदन कुमार और आईडीएसपी के राहुल कुमार सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने यह सुनिश्चित किया कि बच्चों और उनके परिजनों को यात्रा के दौरान किसी तरह की असुविधा न हो. अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक बच्चे के साथ एक अभिभावक को जाने की अनुमति दी गई है, जिनका खर्च भी सरकार द्वारा वहन किया जाएगा. यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रशासन की गंभीरता और संवेदनशीलता को दर्शाती है.
परिजनों के चेहरे पर लौटी उम्मीद
लंबे समय से अपने बच्चों की गंभीर हृदय बीमारी से जूझ रहे अभिभावकों के लिए यह पल भावुक कर देने वाला है. कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण इलाज कराने में असमर्थ थे और बच्चों की बिगड़ती हालत देखकर परेशान थे. अब बेहतर इलाज की सुविधा मिलने से उनके चेहरे पर राहत और उम्मीद साफ झलक रही है. स्वास्थ्य विभाग की इस पहल ने न केवल बच्चों को नया जीवन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद लोगों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत किया है. उम्मीद जताई जा रही है कि इलाज के बाद ये सभी बच्चे स्वस्थ होकर जल्द ही अपने घर लौटेंगे.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें




