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Real Estate Update : रियल एस्टेट सेक्टर पर इस साल महंगाई का जोखिम बढ़ गया है. परामर्श फर्म जेएलएल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ नए लेबर लॉ से मजदूरी भी महंगी हो गई है. इसका असर रियल एस्टेट परियोजनाओं पर दिखेगा और निर्माण की लागत 5 फीसदी तक बढ़ सकती है.
जेएलएल ने दावा किया है कि इस साल मकान बनाना महंगा होगा.
नई दिल्ली. सरकार ने पिछले साल सितंबर में जब 200 से ज्यादा वस्तुओं पर जीएसटी की दरें घटाईं थी तो लग रहा था कि अब हर चीज सस्ती हो जाएगी. लेकिन, सच्चाई ठीक इसके उलट दिखी जब कंपनियों ने कुछ ही समय बाद अपने उत्पादों की कीमतों में जीएसटी कटौती से भी कहीं ज्यादा बढ़ोतरी करनी शुरू कर दी. ऐसे ही कयास सीमेंट पर 10 फीसदी जीएसटी घटाने के बाद लगाए जा रहे थे, लेकिन रियल एस्टेट की परामर्श फर्म का कहना है कि अन्य चीजों के दाम बढ़ने से मकान निर्माण की लागत इस साल 5 फीसदी तक बढ़ सकती है.
रियल एस्टेट क्षेत्र की परामर्श कंपनी जेएलएल ने बताया कि रियल एस्टेट परियोजनाओं की निर्माण लागत इस साल 3 से 5 फीसदी तक बढ़ सकती है, क्योंकि निर्माण सामग्री और मजदूरी में वृद्धि हो रही है. जेएलएल ने ‘कंस्ट्रक्शन कॉस्ट गाइड, इंडिया – 2026’ नाम से जारी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2026 में सभी प्रकार की संपत्तियों की निर्माण लागत में 3 से 5 फीसदी वृद्धि होने की संभावना है.
कैसा रहा है पिछले साल से हाल
जेएलएल ने बताया कि पिछले वर्ष 2025 में सामग्री लागत मिलीजुली रही थी. सीमेंट, इस्पात और डीजल की कीमतों में मामूली गिरावट (क्रमशः 1-2, 3-4 और 5-6 फीसदी) देखी गई, जबकि एल्युमिनियम और तांबे की कीमतों में वैश्विक मांग और आपूर्ति श्रृंखला के दबावों के कारण 8 से 10 फीसदी तक वृद्धि हुई. मजदूरी लागत सभी श्रेणियों में 5 से 6 फीसदी बढ़ी, जिसका कारण कुशल मजदूरों की कमी और बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग है.
पिछले साल मिली थी राहत
सरकार की जीएसटी 2.0 पहल ने सीमेंट पर 10 फीसदी टैक्स राहत दी, जिससे डेवलपर को 2 से 3 फीसदी की बचत और घर खरीदने वालों के लिए 1 से 1.5 फीसदी की कीमत में कमी की संभावना रही. हालांकि, नवंबर, 2025 में लागू नए श्रम कानून के तहत सामाजिक सुरक्षा लाभ, स्वास्थ्य कवरेज और मानक वेतन ढांचे बढ़ाए गए हैं, जिससे मजदूरी लागत सभी श्रेणियों में 5 से 12 फीसदी बढ़ी और इन बढ़े हुए खर्चों ने निर्माण की लागत पर भी असर डाला है.
इस साल दिखेगा कीमतों का असर
जेएलएल इंडिया के अनुसार, इन सभी कारणों से इस साल 2026 में निर्माण लागत में कुल मिलाकर 3 से 5 फीसदी वृद्धि हो सकती है, जिसका असर परियोजनाओं की आर्थिक योजना पर पड़ सकता है. डेवलपर्स के अलावा अपना मकान बनाने वालों पर भी इन बढ़ी हुई कीमतों का असर दिखेगा और मजदूरी से लेकर उत्पाद तक उनकी लागत बढ़ने का जोखिम है, जो रियल एस्टेट सेक्टर में 5 फीसदी या उससे ज्यादा की महंगाई बढ़ा सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





