सेक्शन 58ए और 135ए का चलेगा डंडा, पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए EC का तगड़ा प्लान, पुलिस को दिया फुल फ्री हैंड

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पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए EC का तगड़ा प्लान, पुलिस को दिया फुल फ्री हैंड

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चुनाव आयोग ने इस बार वोटर्स को भी बहुत बड़ी पावर दे दी है. अगर कोई वोटर किसी धमकी या डर की वजह से पोलिंग स्टेशन नहीं जा पा रहा है. तो वह दूर से ही कमीशन या तय आब्जर्वर को अपनी शिकायत सीधे बता सकता है. ऐसी शिकायत मिलने पर भी पूरी जांच के बाद रीपोल का ऑर्डर दिया जा सकता है. कमीशन वोटरों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह अलर्ट है.

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23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. (फाइल फोटो)

कोलकाता. चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में दोबारा चुनाव कराने के लिए और सख्त रवैया अपनाने वाला है. अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वोटरों को डराने-धमकाने या वोटिंग में रुकावट डालने के मामलों में अब दोबारा चुनाव कराने का आदेश और तेजी से दिया जा सकता है. इस मामले से वाकिफ एक अधिकारी ने बताया कि अब तक रीपोल सिर्फ ‘बहुत खास’ मामलों में ही होते थे, लेकिन अब कमीशन शिकायतों और फील्ड रिपोर्ट के आधार पर ज्यादा तेजी से कार्रवाई करने के लिए तैयार है.

ध्यान दें कि रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951, खास हालात में रीपोलिंग के लिए नियम देता है. कानून खास बूथ या पोलिंग स्टेशन पर रीपोल कराने की इजाजत देता है और ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर आखिरी फैसला कमीशन का होता है. पिछले चुनावों में, राजनीतिक पार्टियों ने राज्यभर के कई पोलिंग स्टेशनों पर अक्सर डराने-धमकाने, बूथ कैप्चरिंग और वोटिंग में रुकावट डालने का आरोप लगाया था. हालांकि ऐसे कई मामलों में रीपोल का ऑर्डर नहीं दिया गया, क्योंकि फैसले ज्यादातर पीठासीन अधिकारियों की रिपोर्ट पर आधारित थे.

इस बार, कमीशन से ज्यादा तुरंत और प्रोएक्टिव फैसले लेने की उम्मीद है. अधिकारियों ने बताया कि अगर पोलिंग के दौरान कानून-व्यवस्था में कोई गंभीर गड़बड़ी होती है तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है. कमीशन के मुताबिक, रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के सेक्शन 58ए के तहत बूथ कैप्चरिंग के मामलों में प्रभावित बूथों पर वोट कैंसिल कर दिए जाएंगे और रीपोल का आदेश दिया जाएगा.

इसी तरह, अगर वोटरों को वोट डालने से रोका जाता है तो संबंधित बूथों पर पोलिंग कैंसिल कर दी जाएगी. एक्ट के सेक्शन 135ए के तहत, बूथों पर जबरदस्ती कब्जा करने, वोटिंग में रुकावट डालने या पोलिंग स्टेशन तक पहुंचने से रोकने के मामलों में भी रीपोल का आदेश दिया जा सकता है.

अधिकारियों ने कहा कि जो वोटर धमकियों की वजह से पोलिंग स्टेशन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे कमीशन या तय ऑब्जर्वर से दूर से भी शिकायत कर सकते हैं. ऐसे मामलों में रीपोल का आदेश देने सहित जरूरी कार्रवाई की जा सकती है. कमीशन ने यह भी कहा कि पुलिस को वोटरों को धमकाने, अशांति फैलाने या रुकावट डालने के मामलों में बिना वारंट के गिरफ्तारी का अधिकार है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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