हजारीबाग की महिलाओं ने किया कमाल, ऑर्गेनिक खेती से लिखी सफलता की नई कहानी

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इन महिलाओं ने इस पहल की शुरुआत झारखंड सरकार की ‘पलाश’ संस्था के सहयोग से की थी. शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण मिला, जिसके बाद उन्होंने ऑर्गेनिक खाद निर्माण को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया. वर्तमान में यह समूह करीब एक दर्जन प्रकार के ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार कर रहा है.

हजारीबाग: रासायनिक खाद के दुष्प्रभावों के बीच अब किसान तेजी से ऑर्गेनिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं. ऑर्गेनिक खाद न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखने में भी सहायक होती है. झारखंड के हजारीबाग जिले के लुपुंग पंचायत की सात महिलाओं का एक समूह इस दिशा में एक मिसाल बनकर उभरा है. यह समूह ऑर्गेनिक खाद तैयार कर न केवल अपनी खेती की पैदावार बढ़ा रहा है, बल्कि इसे व्यवसाय के रूप में अपनाकर अच्छी आय भी अर्जित कर रहा है.

यह महिला समूह घर और खेतों से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट पदार्थों से विभिन्न प्रकार की ऑर्गेनिक खाद तैयार करता है. इससे एक ओर जहां उत्पादन लागत में कमी आती है, वहीं खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. रासायनिक खाद के लगातार उपयोग से जहां जमीन की उर्वरता घट रही थी, वहीं ऑर्गेनिक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत में सुधार देखने को मिल रहा है. इसका सकारात्मक प्रभाव फसल उत्पादन पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है.

समूह से जुड़ी महिला राखी देवी बताती हैं कि पहले रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग से खेत की उर्वरता लगातार कम हो रही थी और जमीन धीरे-धीरे बंजर होती जा रही थी. लेकिन ऑर्गेनिक खाद के उपयोग के बाद मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और अब पहले की तुलना में बेहतर उत्पादन मिल रहा है. इससे खेती पर होने वाला खर्च भी कम हुआ है और मुनाफा बढ़ा है.

इन महिलाओं ने इस पहल की शुरुआत झारखंड सरकार की ‘पलाश’ संस्था के सहयोग से की थी. शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण मिला, जिसके बाद उन्होंने ऑर्गेनिक खाद निर्माण को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया. वर्तमान में यह समूह करीब एक दर्जन प्रकार के ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार कर रहा है, जिनका उपयोग वे अपनी खेती में करने के साथ-साथ बाजार में अन्य किसानों को भी बेच रही हैं.

समूह की महिलाएं बताती हैं कि पिछले पांच वर्षों से वे लगातार ऑर्गेनिक खाद का निर्माण कर रही हैं और आसपास के किसानों को भी इसके प्रति जागरूक कर रही हैं. आज उनकी तैयार खाद की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इस कार्य से समूह को सालाना करीब 70 से 80 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी हो रही है.

लुपुंग पंचायत की इन महिलाओं की पहल यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयास से किसान न केवल टिकाऊ खेती को बढ़ावा दे सकते हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त बन सकते हैं.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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