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डीजीपी वाई.बी. खुरानिया ने कहा कि अब ओडिशा में माओवादी सिंगल डिजिट में बचे हैं. उनकी संख्या अब बहुत कम रह गई है. कंधमाल, रायगडा और कालाहांडी के जंगलों में अभी भी कुछ नक्सली छिपे हैं. पुलिस उनके लिए लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रही है. डीजीपी ने साफ कहा कि बचे हुए नक्सली तुरंत सरेंडर पॉलिसी का फायदा उठाएं. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें पुलिस की गोलियों का सीधा सामना करना पड़ेगा.
डीजीपी खुरानिया ने बताया कि 77 माओवादियों ने ओडिशा पुलिस के सामने सरेंडर किया है.
भुवनेश्वर. ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाई.बी. खुराानिया ने रविवार को बताया कि पिछले एक साल में सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियानों के चलते राज्य में 77 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 27 उग्रवादियों को मार गिराया गया है. उन्होंने बाकी बचे माओवादी कैडरों से भी हथियार डालने की अपील की.
डीजीपी खुरानिया फुलबनी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जहां नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल सुरक्षा बलों के जवानों को सम्मानित किया गया. उन्होंने बताया कि करीब एक साल पहले देश से माओवादियों के प्रभाव को 31 मार्च 2026 तक खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसके बाद से अभियान तेज किए गए.
डीजीपी के अनुसार, 2025 और 2026 में अब तक माओवाद के खिलाफ बड़ी सफलताएं मिली हैं. इसमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ-साथ ओडिशा पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी), स्पेशल इंटेलिजेंस विंग (एसआईडब्ल्यू) और डिस्ट्रिक्ट वॉलंटरी फोर्स (डीवीएफ) की अहम भूमिका रही.
खुरानिया ने बताया कि 77 माओवादियों ने ओडिशा पुलिस के समक्ष सरेंडर किया है, जबकि 23 सक्रिय माओवादी कैडरों ने छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण किया. इस दौरान सुरक्षा बलों ने अलग-अलग अभियानों में 27 माओवादियों को ढेर किया है. उन्होंने बताया कि 25 जनवरी 2025 को नुआपाड़ा-गरियाबंद सीमा के पास हुए एक संयुक्त ऑपरेशन में 17 माओवादी मारे गए थे, जिनमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के केंद्रीय समिति का एक सदस्य भी शामिल था.
डीजीपी ने कहा कि ताजा आकलन के अनुसार राज्य में सक्रिय माओवादियों की संख्या अब सिंगल डिजिट में रह गई है. हालांकि कंधमाल, रायगड़ा और कालाहांडी के जंगलों में अभी भी कुछ माओवादी कैडर सक्रिय हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षा बल लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे हैं. उन्होंने शेष माओवादियों से अपील की कि वे हथियार डालकर राज्य सरकार की नई पुनर्वास और सरेंडर नीति का लाभ उठाएं, अन्यथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें





