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Patna Road Accident Help: पटना में इंसानियत की एक दिल छू लेने वाली मिसाल सामने आई है. सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक शख्स महीनों तक सड़क किनारे असहाय पड़ा रहा. उसके घाव इतने खराब हो चुके थे कि उनमें कीड़े पड़ गए थे और बदबू फैलने लगी थी, लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया. तभी पटना के कुछ युवाओं ने मानवता दिखाते हुए उसकी मदद की और पीएमसीएच ले गया.
पटना में इंसानियत की एक दिल छू लेने वाली मिसाल सामने आई है. सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक शख्स कई दिनों तक सड़क किनारे झाड़ियों में असहाय पड़ा रहा. उसके घाव इतने खराब हो चुके थे कि उनमें कीड़े पड़ गए थे और बदबू फैलने लगी थी, लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया. तभी पटना के कुछ युवाओं ने मानवता दिखाते हुए उसकी मदद की और पीएमसीएच में भर्ती करवाया. फिलहाल इलाज जारी है.

दरअसल, दानापुर रेलवे स्टेशन गोलंबर के पास बिहटा हाईवे किनारे पिछले 3 से 4 दिनों से एक व्यक्ति लावारिस हालत में कचरे के बीच पड़ा हुआ था. उसकी तरफ से काफी ज्यादा मात्रा में दुर्गंध आ रही थी. स्थानीय लोग इस शख्स को नोटिस तो कर रहे थे लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था. बगल के ही मोहल्ले में रहने वाले एक दंपति ने शहर के कई सामाजिक संगठनों और फाउंडेशन से संपर्क किया, लेकिन कहीं से भी मदद नहीं मिल सकी. इसके बाद स्थानीय लोगों ने इस मामले की जानकारी बीइंग हेल्पर फाउंडेशन को दी. सूचना मिलते ही टीम तुरंत एक्शन में आ गई.

पटना के युवाओं की यह टीम अपने संकट मोचन एम्बुलेंस से दानापुर-खगौल पहुंची और घायल व्यक्ति का हाल देखा. फाउंडेशन के संस्थापक शुभम कुमार ने बताया कि जब हमलोग वहां पहुंचे तो देखा कि व्यक्ति की हालत अत्यंत गंभीर थी. उनका एक पैर पूरी तरह जख्मी था, जिसमें कीड़े लग चुके थे. साथ ही मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी, जिसके कारण वे अपना परिचय स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहे थे. कई महीनों से साफ-सफाई नहीं होने के कारण उनके शरीर और कपड़ों से अत्यधिक दुर्गंध आ रही थी. कपड़े भी पूरी तरह गंदे थे.
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आपको बता दें कि पिछले 8 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण एवं आपातकालीन सेवाओं के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है. गंगा स्वच्छता, मिशन सिविक सेंस, प्लास्टिक ट्री गार्ड, प्लास्टिक बोतल बैंक जैसे कई कार्यों ने जमकर सुर्खियां बटोरी. यह संस्था सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद, जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना और आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत सहायता प्रदान करने जैसे मानवीय कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है. इस ग्रुप में शहर के डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, स्टूडेंट्स सहित अलग अलग क्षेत्रों में काम करने वाले युवा जुड़े हैं. सड़क हादसे में घायल लोगों को बचाने के लिए संकट मोचन फ्री एम्बुलेंस सेवा नई शुरुआत है.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुभम कुमार की टीम ने तुरंत कार्रवाई की. उन्होंने बताया कि आसपास के लोगों द्वारा उपलब्ध कराए गए कपड़े उस व्यक्ति को पहनाएं गए. साथी अंकित राज, रोहित राज झा और आनंद सलोना के सहयोग से सबसे पहले फर्स्ट एड दिया गया. दवाई खाओ पर डालते ही करीब दो किलो कीड़ा निकला. कीड़े ने हड्डी को अंदर से खोखला करते हुए घुटने तक पहुंच गए थे. स्थित बेहद भयावह थी. मास्क लगाने के बावजूद भी वहां खड़ा रहना मुश्किल हो रहा था.

फिर भी हमलोगों हिम्मत जुटाई और सड़क हादसों में घायल लोगों लिए संस्था द्वारा शुरू संकट मोचन एम्बुलेंस के जरिए तत्काल पीएमसीएच में भर्ती कराया. फिलहाल उनका इलाज जारी है. डॉक्टरों ने बताया कि पैर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. इसीलिए काटना पड़ेगा. फिलहाल कीड़ों को मारने का प्रयास किया जा रहा है.





