होर्मुज बंद, फिर भी भारत का बन रहा काम, ईरान से 7 साल बाद हुआ ऐसा काम, भर जाएगी तेल भंडार

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होर्मुज बंद मगर भारत को तेल भेज रहा है ईरान; 7 साल बाद आएगी पहली खेप

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ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक ऑयल टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है. जी हां, सात साल बाद भारत को ईरानी तेल टैंकर मिलने जा रहा है. यह मई 2019 के बाद से भारत को तेहरान के कच्चे तेल की पहली संभावित डिलीवरी होगी. पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका ने 21 मार्च को ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया था.

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बंद है होर्मुज, लेकिन भारत को कच्चा तेल भेज रहा है ईरान; 7 साल बाद आएगी पहली खेप

Hormuz News: होर्मुज संकट के बीच भारत ने समंदर में बड़ा खेल कर दिया है. ईरान जंग के कारण ईंधन संकट भारत को छू भी नहीं सकता है. कारण कि होर्मुज बंद होने के बाद भी भारत के तेल और एलपीजी टैंकल लगातार आ रहे हैं. अब ईरान संग भारत वह करने जा रहा है जो सात साल में अब तक नहीं हुआ है. जी हां, ईरान से 7 साल बाद तेल की पहली खेप भारत आ रही है. करीब सात साल के बाद भारत को ईरान से कच्चा तेल जल्द मिलने की संभावना है. ईरानी तेल से लदा एक जहाज गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा है.

जहाजों की निगरानी करने वाले आंकड़ों के मुताबिक, ‘पिंग शुन’ नामक यह जहाज लगभग छह लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत की तरफ बढ़ रहा है. जिंस विश्लेषण फर्म केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि यह मई 2019 के बाद भारत को ईरानी तेल की पहली आपूर्ति हो सकती है. उन्होंने बताया कि हाल में ‘समुद्र में मौजूद’ ईरानी तेल की खरीद के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा 30 दिन की छूट दिए जाने के बाद ही यह आपूर्ति संभव हुई है.

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस जहाज में मौजूद कच्चे तेल का खरीदार कौन है. लेकिन इस जहाज का गंतव्य वाडिनार में स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी हो सकती है. वाडिनार बंदरगाह भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की बीना रिफाइनरी सहित अन्य इकाइयों के लिए भी आपूर्ति का केंद्र है. पेट्रोलियम मंत्रालय अब तक यह कहता रहा है कि ईरान से तेल खरीद दोबारा शुरू करने का फैसला तकनीकी एवं व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर किया जाएगा.

भारत ऐतिहासिक तौर पर ईरानी तेल का बड़ा खरीदार रहा है। एक समय भारत के कुल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 11.5 प्रतिशत थी. वर्ष 2018 में भारत ने प्रतिदिन करीब 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल का आयात किया था, जो मई, 2019 तक घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. फिर ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल का आयात पूरी तरह बंद हो गया था.

रितोलिया ने कहा, ‘मार्च महीने की शुरुआत में ‘पिंग शुन’ जहाज ने ईरान के खार्ग द्वीप से तेल भरा था. इसके चार अप्रैल को वाडिनार बंदरगाह पर आने पर अनुमान है.’ अमेरिका ने हाल में ईरानी तेल की समुद्र में मौजूद खेप की खरीद पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी थी जो 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी. यह कदम अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास के तहत उठाया गया.

अनुमान है कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की कुल मात्रा करीब 9.5 करोड़ बैरल है, जिसमें से लगभग 5.1 करोड़ बैरल भारत को बेचा जा सकता है, जबकि बाकी तेल चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के खरीदारों के लिए अधिक उपयुक्त माना जा रहा है. हालांकि, इस तेल खरीद के भुगतान की व्यवस्था अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. दरअसल, ईरान वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क ‘स्विफ्ट’ से बाहर है. पहले भारत ने तुर्किये के एक बैंक के जरिये यूरो में भुगतान किया था, लेकिन अब वह विकल्प भी उपलब्ध नहीं है.

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Shankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें



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