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S. Jaishankar France Visit: ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा हुआ है. एनर्जी क्राइसिस इस कदर गहराया है कि कई देशों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इन सबके बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर एक और कूटनीतिक मिशन पर निकलने वाले हैं.
ईरान युद्ध और तेल-गैस संकट के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी कूटनीति का लोहा मनवाया. अब वे फ्रांस के दौरे पर जा रहे हैं. (फाइल फोटो/Reuters)
S. Jaishankar France Visit: विदेश मंत्री एस. जयशंकर वैसे तो कई मौकों पर अपनी कूटनीति का लोहा मनवा चुके हैं, लेकिन ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट क्राइसिस के दौरान उन्होंने जिस तत्परता से देशहित में काम किया उसको लंबे समय तक याद रखा जाएगा. ईरान वॉर और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच अब एस. जयशंकर एक और विदेश यात्रा पर जा रहे हैं. इस बार वे फ्रांस जा रहे हैं. वहां वे G7 की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे. उनका यह दौरा नेशनल और जियो-पॉलिटिक्स के लिहाज से बेहद अहम है. उनके एजेंडे पर क्या-क्या है और क्या वे इस मौके पर फ्रांस के टॉप लीडरशिप से भी मुलाकात करेंगे, इसका ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. हालांकि, माना जा रहा है कि इस मौके पर 114 राफेल फाइटर जेट के सौदे पर बातचीत हो सकती है. बता दें कि भारत ने फ्रांस के साथ 3.25 लाख करोड़ रुपये मूल्य की डिफेंस डील की है, जिसके तहत 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की प्लानिंग है. जयशंकर के फ्रांस दौरे के दौरान इस डील को रफ्तार दी जा सकती है. यह वही राफेल फाइटर जेट है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को घुटनों पर लाया था.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर 26 और 27 मार्च 2026 को फ्रांस का दौरा करेंगे. विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह यात्रा फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री ज्यां नोएल बारो (Jean Noël Barrot) के निमंत्रण पर हो रही है, जहां डॉ. जयशंकर G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे. बैठक के दौरान वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा होने की संभावना है. MEA ने बताया कि इस महत्वपूर्ण मंच पर भारत की भागीदारी वैश्विक मुद्दों पर उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है. इसके अलावा विदेश मंत्री की बैठक के इतर विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी प्रस्तावित हैं. इन बैठकों में आपसी सहयोग को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा.
एयर फायर पावर को धार
दरअसल, भारत सरकार ने देश की एयर पावर को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम के तहत 114 अत्याधुनिक Rafale F4 fighter jets की खरीद प्रक्रिया को तेज कर दिया है. करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस प्रस्तावित सौदे को हाल के वर्षों के सबसे बड़े रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रमों में गिना जा रहा है. यह डील केवल लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और भविष्य की युद्ध क्षमताओं को मजबूत करना भी है. इस परियोजना की सबसे अहम विशेषता इसका मेक इन इंडिया पर जोर है. योजना के तहत 114 में से 96 राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए फ्रांस की Dassault Aviation और एक भारतीय औद्योगिक साझेदार के बीच सहयोग स्थापित किया जाएगा. ऐसे में जयशंकर की फ्रांस यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है.
राफेल का एडवांस वर्जन
राफेल F4 वर्जन पहले के मॉडलों की तुलना में काफी उन्नत है. इसमें बेहतर सेंसर फ्यूजन तकनीक दी गई है, जिससे विमान विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं को इकट्ठा कर पायलट को स्पष्ट और त्वरित निर्णय लेने में मदद करता है. यह क्षमता आधुनिक नेटवर्क सेंट्रिक वॉर के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां रियल टाइम डेटा और त्वरित प्रतिक्रिया सफलता की कुंजी होती है. इस फाइटर जेट में उन्नत RBE2 AESA radar लगाया गया है, जो अधिक दूरी तक लक्ष्य का पता लगाने, हाई-प्रिसिजन से ट्रैकिंग करने और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के खतरों से निपटने में सक्षम है. इसके साथ ही बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और अत्याधुनिक डेटा लिंक इसे युद्धक्षेत्र में एक केंद्रीय भूमिका निभाने में सक्षम बनाते हैं. राफेल F4 की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सैटेलाइट कनेक्टिविटी है, जिससे यह विमान दृष्टि सीमा से परे भी सुरक्षित संचार बनाए रख सकता है. यह सुविधा आधुनिक युद्ध में अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जहां वायु, थल, जल और अंतरिक्ष से जुड़े सभी संसाधनों के बीच समन्वय आवश्यक होता है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें





