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11 डॉक्टरों वाले परिवार की बेटी बनी शेफ! सिंगापुर से ट्रेनिंग लेकर सहारनपुर में शुरू किया कैफे, मिलिए शुभांगी खन्ना से

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Shubhangi Khanna Success Story Saharanpur: जिस परिवार में 11 डॉक्टर हों, वहां से किसी बेटी का शेफ बनना थोड़ा हैरान जरूर करता है, लेकिन शुभांगी खन्ना ने अपनी मेहनत से इस फैसले को सही साबित कर दिया है. सिंगापुर से ट्रेनिंग लेकर आईं शुभांगी अब सहारनपुर के बाजोरिया रोड पर अपनी कॉफी और केक की खुशबू बिखेर रही हैं. नीट (NEET) क्लियर करने के बाद डॉक्टर बनने की राह छोड़ने वाली शुभांगी की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो लीक से हटकर अपने सपनों को जीना चाहते हैं.

सहारनपुर: यूपी का सहारनपुर शहर अपने खान-पान के लिए हमेशा से मशहूर रहा है. लेकिन इन दिनों यहां एक ऐसी शेफ की चर्चा हो रही है, जिन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई और स्टेथोस्कोप छोड़कर ओवन और एप्रन को अपना साथी बनाया है. हम बात कर रहे हैं शुभांगी खन्ना की. शुभांगी एक ऐसे परिवार से आती हैं जहां चारों तरफ डॉक्टर्स ही डॉक्टर्स हैं. परिवार में 11 लोग डॉक्टर हैं, लेकिन शुभांगी ने रसोई की कला में अपना भविष्य देखा और आज उनके हाथों से बने केक और कॉफी का स्वाद लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है.
शुभांगी को बचपन से ही कुकिंग का शौक था, लेकिन करियर को लेकर वह थोड़ी उलझन में थीं. आखिरकार उन्होंने अपने दिल की बात माता-पिता को बताई. उनके पिता डॉ. पंकज खन्ना और माता डॉ. दीपशिखा ने बेटी के इस अलग फैसले का पूरा सम्मान किया और उन्हें इस राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.

सिंगापुर से सीखी कला और पांच सितारा होटल्स में किया काम
शुभांगी खन्ना ने अपने सपनों को नई उड़ान देने के लिए सिंगापुर का रुख किया. वहां उन्होंने मशहूर ‘एकेडमी ऑफ पेस्ट्री एंड कलिनरी आर्ट्स’ से अपनी विशेषज्ञता हासिल की. इसके बाद उन्होंने कई नामी पांच सितारा होटल्स में बतौर पेस्ट्री शेफ काम किया और अपनी कला को निखारा. उनके काम की बारीकियों और स्वाद के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. आज वह बाजोरिया रोड पर ‘Coffee N Cake’ के नाम से अपनी शॉप चला रही हैं, जहां न केवल सहारनपुर बल्कि देहरादून और दिल्ली तक से लोग खिंचे चले आते हैं.

नीट भी क्लियर कर चुकी है शुभांगी
शेफ शुभांगी ने बताया कि उन्होंने अपनी हायर सेकेंडरी में मेडिकल विषय ही लिया था और नीट की परीक्षा भी क्लियर कर ली थी. लेकिन धीरे-धीरे उन्हें यह अहसास हुआ कि उनका दिल डॉक्टरी में नहीं, बल्कि कुकिंग में बसता है. वह अपनी दादी को याद करते हुए कहती हैं कि उनकी दादी बिना किसी नाप-तौल के बहुत स्वादिष्ट केक बनाती थीं. शायद वही हुनर और स्वाद उन्हें विरासत में मिला है. जब उन्होंने शेफ बनने का मन बनाया, तो उनके माता-पिता ने एक बार भी मना नहीं किया और हमेशा ढाल बनकर खड़े रहे.

अपने शहर के लिए कुछ नया करने की चाहत
सहारनपुर में अक्सर लोग अच्छी बेकरी आइटम्स के लिए दिल्ली या देहरादून की ओर भागते हैं. शुभांगी चाहती तो दिल्ली जैसे बड़े शहर में अपना काम शुरू कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने अपने गृहनगर को चुना. वह चाहती हैं कि सहारनपुर के लोगों को यहीं बेहतरीन स्वाद मिले और यहां की लड़कियां उनसे प्रेरित होकर अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ें. पिछले एक साल से अपना कैफे चला रहीं शुभांगी बताती हैं कि अब उन्हें ग्राहकों के चेहरे देखकर ही पता चल जाता है कि उन्हें डिश पसंद आई है या नहीं. शुभांगी का मानना है कि इंसान को उसी काम में हाथ डालना चाहिए जिसमें उसका सच्चा लगाव हो. वह अपने परिवार की पहली सदस्य हैं जो फूड इंडस्ट्री में आई हैं और उन्हें अपनी इस नई पहचान पर गर्व है.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



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