19 टन वजन, 670KM की रफ्तार: कच्ची सड़क या हिमालय की चोटी, C-130J सुपर हरक्यूलिस दुश्‍मन की किस्मत कर देगा खोटी!

Date:


नई दिल्‍ली. आज दक्षिण एशिया के कोलंबिया में हुए विमान हादसे में वहां के 110 सैनिकों की मौत की खबर आई। दुनिया के सबसे भरोसेमंद सैन्य परिवहन विमानों में से एक C-130J सुपर हरक्यूलिस क्रैश होने के बाद यह दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बन गया. यह विमान न केवल अमेरिकी वायुसेना की रीढ़ है बल्कि भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में भी संकटमोचक की भूमिका निभाता है. जब भी दुर्गम इलाकों में सेना पहुंचानी हो या आपदा के समय राहत कार्य करना हो, यह विमान रक्षा विशेषज्ञों की पहली पसंद होता है.

तकनीकी खासियतें और क्षमता
लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित यह विमान चार टर्बोप्रॉप इंजनों वाला एक वर्कहॉर्स है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी शॉट टेक ऑफ एंड लैडिंग (STOL) क्षमता है. यह दुनिया के उन चुनिंदा भारी विमानों में शामिल है जो कच्ची सड़कों, रेतीले मैदानों या हिमालय की ऊंची और बेहद छोटी हवाई पट्टियों (जैसे दौलत बेग ओल्डी) पर भी आसानी से उतर सकता है.

· लोड क्षमता: यह विमान लगभग 19,000 किलोग्राम (19 टन) से अधिक का पेलोड ले जा सकता है. इसमें 90 से अधिक पूरी तरह सुसज्जित सैनिक या 60 से अधिक पैराट्रूपर्स एक साथ उड़ान भर सकते हैं.

· रफ्तार और रेंज: इसकी अधिकतम रफ्तार 670 किमी/घंटा है और यह एक बार में 3,300 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकता है.

भारतीय वायुसेना के पास कितनी ताकत?
भारत ने साल 2011 से इन विमानों को अपने बेड़े में शामिल करना शुरू किया था. वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 12 C-130J सुपर हरक्यूलिस विमानों का बेड़ा है. भारत ने इनका उपयोग न केवल सैन्य अभियानों में बल्कि ऑपरेशन कावेरी (सूडान) और उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए भारी मशीनें पहुंचाने में भी किया है.

क्या यह क्रैश भारत के लिए चिंता का विषय है?
आज का क्रैश एक गंभीर घटना है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि C-130J का ओवरऑल सेफ्टी रिकॉर्ड बेहतरीन है. दुर्घटना के पीछे तकनीकी खराबी, मौसम या मानवीय चूक जैसे कारण हो सकता है. भारत के लिए यह विमान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चीन और पाकिस्तान सीमा पर ऊंचे युद्ध क्षेत्रों में रसद पहुंचाने का सबसे तेज जरिया है. यदि किसी खास बैच के विमानों में तकनीकी खामी पाई जाती है तो भारत को भी अपने बेड़े की गहन जांच करानी पड़ सकती है.

सवाल-जवाब
C-130J सुपर हरक्यूलिस को स्पेशल ऑपरेशंस का उस्ताद क्यों माना जाता है?

इसमें इंफ्रारेड सेंसर, मिसाइल वार्निंग सिस्टम और दुश्मन के रडार से बचने की तकनीक लगी होती है, जिससे यह अंधेरे में और खतरनाक युद्ध क्षेत्रों में भी सुरक्षित मिशन पूरा कर सकता है.

भारतीय वायुसेना ने इस विमान का सबसे यादगार इस्तेमाल कहां किया था?

भारतीय वायुसेना ने इसे लद्दाख में दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी ‘दौलत बेग ओल्डी’ (16,614 फीट) पर उतारकर अपनी रणनीतिक ताकत का लोहा मनवाया था.

क्या आज का क्रैश विमान के डिजाइन की कमी को दर्शाता है?

नहीं, C-130J दुनिया भर में 50 से अधिक देशों द्वारा उपयोग किया जा रहा है और इसका ‘मिशन रेडीनेस रेट’ बहुत अधिक है. क्रैश के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चलेगा.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related