2300 Old Potsherd Found in India: खुदाई में मिला 2300 साल पुराना ‘मैसेज’, मिट्टी के टुकड़े पर लिखे सिर्फ 5 शब्द, अब ASI करेगी जांच

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2300 Old Potsherd Found in India: इतिहास कभी-कभी बहुत छोटी चीजों में छिपा होता है और वही छोटी चीजें बड़े रहस्य खोल देती हैं. मिट्टी का एक साधारण सा टुकड़ा, जिस पर सिर्फ पांच शब्द लिखे हों, पहली नजर में महत्वहीन लग सकता है. लेकिन जब वही टुकड़ा करीब 2300 साल पुराना हो तो वह अतीत की एक अनमोल चिट्ठी बन जाता है. तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में हुई खुदाई में ऐसा ही एक ‘मैसेज’ मिला है. इस मैसेज ने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों की उत्सुकता बढ़ा दी है. यह खोज न सिर्फ एक शब्द की कहानी है, बल्कि उस दौर की सत्ता, संस्कृति और समाज की झलक भी देती है. यह टुकड़ा चेर काल के मिट्टी के बर्तनों का है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई इस खोज ने चेर काल के इतिहास को फिर से चर्चा में ला दिया है. मिट्टी के इस टुकड़े पर लिखे पांच अक्षर ‘इरुम्पुरै’ उस समय के शासकों से जुड़े माने जा रहे हैं. यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक पहचान है, जो उस युग की राजनीतिक और सांस्कृतिक ताकत को दर्शाती है. अब इस खोज की गहराई से जांच की जाएगी, ताकि इसके पीछे छिपी कहानी को पूरी तरह समझा जा सके.

2300 साल पुराना ‘मैसेज’ क्या कहता है?

  • तिरुपुर जिले के कुमारिक्कलपालायम क्षेत्र में खुदाई के दौरान यह खास मिट्टी का टुकड़ा मिला है. पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार यह टुकड़ा एक बड़े भंडारण बर्तन का हिस्सा था, जो ‘ब्लैक एंड रेड वेयर’ परंपरा से जुड़ा है. इस पर तमिल-ब्राह्मी लिपि में ‘इरुम्पुरै’ लिखा हुआ है, जो चेर राजाओं की उपाधि मानी जाती है. इससे यह संकेत मिलता है कि यह इलाका उस समय चेर वंश के प्रभाव में रहा होगा.
  • यह खुदाई फरवरी महीने में शुरू हुई थी और अब तक यहां से कई महत्वपूर्ण चीजें मिल चुकी हैं. इनमें अलग-अलग तरह के मिट्टी के बर्तन शामिल हैं, जो उस समय के लोगों के जीवन, खान-पान और व्यापार के बारे में जानकारी देते हैं. यह जगह आयरन एज और प्रारंभिक ऐतिहासिक काल का एक बड़ा निवास क्षेत्र मानी जा रही है, जहां लोगों का जीवन काफी विकसित था.
यह टुकड़ा इसलिए खास है क्योंकि इस पर लिखा शब्द सीधे तौर पर चेर वंश से जुड़ा हुआ है. (फोटो Instagram-ASI)

चेर काल क्या था और क्यों है यह खोज अहम?

चेर काल प्राचीन दक्षिण भारत के तीन प्रमुख तमिल राजवंशों में से एक था, जिसमें चोल और पांड्य वंश भी शामिल थे. यह वंश मुख्य रूप से वर्तमान केरल और तमिलनाडु के पश्चिमी-उत्तर क्षेत्रों, जैसे करूर, कोयंबटूर और तिरुपुर तक फैला हुआ था. चेर राजाओं की राजधानी वांजि या करुवूर मानी जाती थी, जबकि मुचिरी बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा केंद्र था, जहां से रोमन साम्राज्य तक मसाले, मोती और हाथी दांत का व्यापार होता था. संगम साहित्य में उथियन चेरलाथन और सेनगुट्टुवन जैसे राजाओं का विस्तार से वर्णन मिलता है. इतिहासकार मानते हैं कि इस वंश की शुरुआत लगभग 300 ईसा पूर्व हुई और यह संगम युग का अहम हिस्सा रहा. अशोक के शिलालेखों में इन्हें ‘केरलपुत्र’ कहा गया है. इस काल में ब्लैक एंड रेड वेयर जैसे खास मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता था, जो उस समय की तकनीक और जीवनशैली को दर्शाते हैं. यही कारण है कि खुदाई में मिले ऐसे अवशेष इतिहास को समझने में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

चेर वंश दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राजवंशों में से एक था. (फोटो Instagram-ASI)

यह मिट्टी का टुकड़ा इतना खास क्यों है?

यह टुकड़ा इसलिए खास है क्योंकि इस पर लिखा शब्द सीधे तौर पर चेर वंश से जुड़ा हुआ है. ‘इरुम्पुरै’ कोई सामान्य शब्द नहीं, बल्कि एक शाही उपाधि मानी जाती है. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि उस समय इस क्षेत्र पर किसका शासन था. साथ ही, यह उस दौर की भाषा और लेखन शैली को भी समझने का एक अहम माध्यम है.

चेर वंश का इतिहास क्या बताता है?

चेर वंश दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राजवंशों में से एक था. इसका शासन मुख्य रूप से आज के केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में फैला हुआ था. यह वंश अपने व्यापार, खासकर रोमन साम्राज्य के साथ संबंधों के लिए प्रसिद्ध था. मसाले, मोती और हाथी दांत जैसे सामान का व्यापार होता था. इस खोज से उस वंश के प्रभाव क्षेत्र की पुष्टि और मजबूत होती है.

ASI इस खोज की आगे कैसे जांच करेगा?

ASI अब इस टुकड़े का विस्तृत अध्ययन करेगा. इसमें लिपि की जांच, मिट्टी की संरचना और आसपास मिले अन्य अवशेषों का विश्लेषण शामिल होगा. इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि यह बर्तन किस उद्देश्य से इस्तेमाल होता था और उस समय के लोग किस तरह का जीवन जीते थे. यह जांच इतिहास के कई नए पहलुओं को सामने ला सकती है.

आगे क्या खुलासे हो सकते हैं?

पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज सिर्फ शुरुआत है. खुदाई अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण अवशेष मिल सकते हैं. इससे प्राचीन तमिल सभ्यता, व्यापारिक संबंधों और सामाजिक संरचना के बारे में नई जानकारी सामने आ सकती है. यह छोटा सा मिट्टी का टुकड़ा भविष्य में बड़े ऐतिहासिक रहस्यों को उजागर कर सकता है.



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