3000 लागत और 80 हजार तक कमाई, बाकला खेती से बदल रही किसानों की किस्मत..यहां जानिए मिट्टी, लागत और मुनाफे की पूरी जानकारी

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बाकला की खेती कैसे करें? जानिए मिट्टी, लागत और मुनाफे की पूरी जानकारी

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खीरी जिले के रहने वाले किसान रूप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि हम पिछले कई वर्षों से लगातार सब्जी की बिक्री कर रहे थे वही उससे कम मुनाफा होता था. परंतु अब हम सब्जी अपने खेतों में तैयार कर रहे हैं खीरी जिले के तराई इलाके में किसान इस समय बाकला की खेती कर रहे हैं. इस सब्जी को लोग अलग-अलग नाम से जानते हैं बाकला एक पौष्टिक फलीदार सब्जी है.बाकला प्र

लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान नगदी फसल के रूप में सब्जी की खेती कर रहे हैं. सब्जी की खेती कर किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है वहीं खीरी जिले के तराई इलाके में किसान इस समय बाकला की खेती कर रहे हैं. इस सब्जी को लोग अलग-अलग नाम से जानते हैं. बाकला एक पौष्टिक फलीदार सब्जी है. बाकला प्रोटीन, फाइबर और विटामिन का बेहतरीन स्रोत है. यही वजह है कि बाजार में इसकी खूब डिमांड रहती है.

खीरी जिले के रहने वाले किसान रूप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि हम पिछले कई वर्षों से लगातार सब्जी की बिक्री कर रहे थे, जिसमें उन्हें कम मुनाफा होता था. परंतु अब हम बांकला की सब्जी अपने खेतों में तैयार कर रहे हैं और उसे हम बाजारों में बेच रहे हैं जिससे हमें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है.

लागत और मुनाफा

वहीं इस समय करीब दो बीघा में हम बाकला की खेती कर रहे हैं. लागत की बात की जाए तो एक बीघे में करीब ₹3000 का खर्च आता है. इनकम की बात की जाए तो एक बीघे में करीब 70 से 80 हजार रुपए आसानी से मिल जाते हैं. बाजारों में इस समय ₹30 से लेकर ₹40 प्रति किलो के हिसाब से बिक्री होती है, क्योंकि बाकला हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है जिस कारण लोग इसकी सब्जी बेहद पसंद करते हैं. बाकला की खेती करने से कभी भी किसानों को नुकसान नहीं हो सकता है.

बाकला की खेती करते समय इन बातों का रखें ध्यान

बाकला (ब्रॉड बीन) के अच्छे उत्पादन के लिए अच्छी जल निकास वाली मृदा होना आवश्यक है. इसकी खेती के लिए दोमट (लोम) मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसका pH मान लगभग 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए. यह फसल हल्की नमी वाली मिट्टी में बेहतर बढ़ती है, इसलिए अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती. जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करना ही पर्याप्त होता है, क्योंकि जलभराव से फसल को नुकसान हो सकता है.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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