74 रुपये में बेचनी पड़ी 12 हजार करोड़ की कंपनी, कॉरपोरेट इतिहास सबसे बड़ा नुकसान, एक चूक ने कर दिया बंटाधार

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नई दिल्‍ली. किसी भी बिजनेसमैन का यही सपना होता है कि वह जो भी पैसा अपने कारोबार में निवेश करे, कई गुना बढ़कर वापस मिले. लेकिन, एक कारोबारी ऐसे भी हुए जिनकी कंपनी तो हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गई पर एक गलती ने उनका सारा साम्राज्‍य डुबा दिया और महज 74 रुपये में पूरा धंधा बेचना पड़ गया. इस घटना को कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े नुकसान के तौर पर जाना जाता है. अर्श से फर्श तक आने की यह कहानी है बीआर शेट्टी की, जो बताती है कि किसी भी धंधे में पारदर्शिता क्‍यों जरूरी है.

शेट्टी ने एक समय हेल्‍थकेयर और फाइनेंस सेक्‍टर में अपना 10 अरब डॉलर यानी करीब 93 हजार करोड़ रुपये का अम्‍पायर खड़ा किया था. लेकिन, कुछ गलतियों की वजह से उनके इस अम्‍पायर का एक हिस्‍सा पूरी तरह ढह गया और महज 74 रुपये में बेचना पड़ा. यह कोई अचानक आया तूफान नहीं था, बल्कि कंपनी के डॉक्‍यूमेंट की बड़ी खामी की वजह से हुआ नुकसान था. आखिर यह नुकसान कैसे और क्‍यों हुआ और नए कारोबारियों को इस घटना से क्‍या सबक लेना चाहिए.

कहां शुरू किया कारोबारी सफर
बीआर शेट्टी का जन्‍म 1 अगस्‍त, 1942 को उडुपी में हुआ था. उन्‍होंने मनिपाल से फार्मा की पढ़ाई पूरी की और परिवार में आर्थिक दिक्‍कत होने की वजह से साल 1973 में यूएई चले गए. वहां सबसे पहले उन्‍होंने मेडिकल रीप्रेजेंटेटिव यानी एमआर की नौकरी की और साल 1975 में न्‍यू मेडिकल सेंटर में छोटी सी क्‍लीनिक शुरू कर दी, जहां उनकी डॉक्‍टर पत्‍नी चंद्रकुमारी शेट्टी प्रैक्टिस करती थीं. उन्‍होंने इलाके के लोगों को सस्‍ती मेडिकल सर्विस देनी शुरू की जिससे जल्‍द ही उनकी क्‍लीनिक काफी पॉपुलर हो गई.

लोकप्रियता के साथ बढ़ता गया कारोबार
समय के साथ उनकी क्‍लीनिक की लोकप्रियता बढ़ती गई और सऊदी अरब, ओमान, यूरोप के साथ लैटिन अमेरिका में भी हेल्‍थकेयर कारोबार पहुंच गया. पैसा आने पर उन्‍होंने हेल्‍थकेयर के अलावा साल 1980 में यूएई में मनी ट्रांसफर सर्विस शुरू कर दी. यहां खाड़ी देशों में काम करने वालों केा अपने घर पैसे भेजने में मदद की जाती थी. साल 2003 में शेट्टी ने नियोफार्मा नाम से अबु धाबी में फार्मा मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट शुरू की. साल 2014 में उन्‍होंने इंटरनेशनल फॉरेन एक्‍सचेंज कंपनी ट्रैवलएक्‍स (Travelex) को खरीद लिया. बाद में उन्‍होंने इन सभी कंपनियों को फिनाब्‍लर (Finablr) नाम की होल्डिंग कंपनी के अंदर ला दिया.

लंदन स्‍टॉक एक्‍सचेंज पर लिस्‍ट हो गई कंपनी
साल 2012 में एनएमसी हेल्‍थ यूएई की पहली हेल्‍थकेयर कंपनी बनी जो लंदन स्‍टॉक एक्‍सचेंज पर लिस्‍ट हुई. शुरुआत में इसका मार्केट कैप 1 अरब डॉलर था, जो बाद में बढ़कर 10 अरब डॉलर यानी करीब 93 हजार करोड़ रुपये पहुंच गई. तब शेट्टी की व्‍यक्तिगत नेट वर्थ बढ़कर करीब 4 अरब डॉलर यानी करीब 38 हजार करोड़ रुपये पहुंच गई थी. तब उन्‍हें भारत सरकार ने पद्म श्री पुरस्‍कार से भी नवाजा था. शेट्टी के बाद बुर्ज खलीफा में भी लग्‍जरी प्रॉपर्टी थी.

2019 से शुरू हुआ पतन
शेट्टी के पतन की कहानी साल 2019 से शुरू हुई, जब अमेरिका स्थिति एक शॉर्ट सेलिंग फर्म मडी वॉटर रिसर्च ने एनएमसी हेल्‍थ के खिलाफ एक रिपोर्ट जारी की. इसमें कहा गया कि कंपनी ने अपने कैश बैलेंस और कर्ज के बारे में निवेशकों से जानकारी छुपाई है. साल 2020 की शुरुआत में एनएमसी हेल्‍थ ने स्‍वीकार कि उस पर 4 अरब डॉलर यानी करीब 38 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. जांच में फर्जी दस्‍तावेज, अनाधिकृत लोन और कमजोर कॉरपोरेट प्रबंधन का भी पता चला. फरवरी 2020 में उन्‍होंने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया और कहा कि उन्‍हें फर्जीवाड़े के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

टूटा भरोसा और ढहने लगा कारोबार
शेट्टी की कंपनी में शुरू हुए फर्जीवाड़े का असर जल्‍द ही व्‍यापक रूप से फैलने लगा और यूएई एक्‍सचेंज के साथ होल्डिंग कंपनी फिनाब्‍लर पर भी इसका असर पड़ा. 8 अप्रैल, 2020 को यूके हाईकोर्ट ने एनएमसी हैल्‍थ के खिलाफ प्रशासन पर जांच बैठा दी. 80 से ज्‍यादा बैंकों ओर कर्जदाताओं को इससे बड़ा नुकसान हुआ, जिसमें 1 अरब डॉलर का नुकसान तो सिर्फ अबु धाबी कॉमर्शियल बैंक को हुआ. साल 2020 से 2023 के बीच शेट्टी की सारी संपत्ति फ्रीज कर दी गई. उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हो गए और फ्रॉड, वित्‍तीय गड़बड़ी के कई केस उनके खिलाफ कोर्ट पहुंच गए. अक्‍टूबर, 2025 में दुबई डीआईएफसी कोर्ट ने शेट्टी को 4.6 करोड़ डॉलर एसबीआई को देने का आदेश जारी कर दिया. यह पैसा 5 करोड़ डॉलर की पर्सनल गारंटी के तौर पर चुकाया गया.

आज भी काम कर रही कंपनी लेकिन…
एनएमसी हेल्‍थ आज भी अपना कारोबार चला रही है, लेकिन इस पर शेट्टी का कोई कंट्रोल नहीं है और पूरी तरह दूसरे मालिकान के हाथ में है. उनकी सभी संपत्तियां आज भी फ्रीज हैं और कई कानूनी लड़ाइयां चल रही हैं. साथ ही कई जांच भी उनके खिलाफ चल रही है. जिस अम्‍पायर को उन्‍होंने 40 साल की मेहनत से खड़ा किया, वह आज पूरी तरह डूब चुका है. नए कारोबारियों के लिए सीधा सबक है कि उन्‍हें कंपनी लंबी चलानी है तो पारदर्शिता का पालन करना होगा.



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