9 पुलिसवालों को मौत की सजा, बाप-बेटे को कस्टडी में मार डाला था, जज ने फैसले में कहा- घटना से दिल कांप उठता है

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इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए जांच एजेंसी सीबीआई ने दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी. अदालत ने उसी पर मुहर लगाते हुए सभी 9 पुलिसकर्मियों के लिए मौत की सजा सुनाई है.

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अदालत ने 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है. (सांकेतिक तस्वीर)

चेन्नई. तमिलनाडु से आई एक खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. मदुरै की अदालत ने बहुचर्चित थूथुकुडी कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) केस में बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुना दी है. यह मामला व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की हिरासत में हुई दर्दनाक मौत से जुड़ा है, जिसने छह साल पहले पूरे देश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी.

अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि ‘सत्ता के दुरुपयोग की हद’ है. कोर्ट ने उस बर्बरता का जिक्र करते हुए कहा, “पिता-पुत्र को कपड़े उतारकर बेरहमी से पीटा गया… इसे पढ़कर ही दिल कांप उठता है.” दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर बालकृष्णन और रघु गणेश समेत कुल 9 लोग शामिल हैं. यह फैसला साफ संदेश देता है कि कानून के रखवाले अगर दरिंदे बनेंगे, तो कानून ही उन्हें सबसे सख्त सजा देगा.

साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि इस फैसले से ईमानदार पुलिसकर्मियों को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने वर्दी की गरिमा को कुचल दिया. यह फैसला सिर्फ एक केस का अंत नहीं, बल्कि उस सोच पर प्रहार है जो वर्दी के नाम पर अत्याचार को जायज ठहराती है. अब साफ है कि न्याय देर से मिला, लेकिन ऐसा मिला जिसने पूरे सिस्टम को हिला दिया.

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि अपराध की भयानक प्रकृति ने, जिसमें तीन प्रत्यक्ष गवाहों की गवाही भी शामिल थी, समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया. मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को उजागर करते हुए, सीबीआई ने कहा कि पीड़ितों को हथियारों से बेरहमी से पीटा गया था, जिसके लिए उन्हें उच्चतम स्तर की सज़ा दी जानी चाहिए।

हिरासत में दी गई यह यातना 19 जून, 2020 की है, जब जयराज और बेनिक्स, जो एक मोबाइल की दुकान चलाते थे, को लॉकडाउन के दौरान कथित तौर पर तय समय से ज़्यादा देर तक दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था; यह आरोप बाद में झूठा पाया गया. उन दोनों को साथनकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कुछ ही दिनों के भीतर, उन दोनों की मौत हो गई.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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