6.5 C
Munich

मलमास क्यों कहलाता है पुरुषोत्तम मास? जानिए इस मास में क्या करें और क्या नहीं

Must read


होमताजा खबरधर्म

मलमास क्यों कहलाता है पुरुषोत्तम मास? जानिए इस मास में क्या करें और क्या नहीं

Last Updated:

17 मई से शुरू हो रहा है ज्येष्ठ अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु की भक्ति, जप-तप और दान के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, जबकि पूजा-पाठ और जरूरतमंदों की मदद से पुण्य फल मिलता है.

फरीदाबाद: 17 मई को ज्येष्ठ अधिक मास की शुरुआत हो रही है. हिंदू धर्म में इस महीने को बेहद पवित्र माना जाता है. इसे अधिक मास, मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा जप-तप और दान करने से कई गुना पुण्य मिलता है. कहा जाता है कि इस दौरान किए गए अच्छे कामों का फल जल्दी मिलता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

क्या होता है मलमास

Local18 से बातचीत में महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं मलमास हर तीन साल में एक बार आता है. हिंदी पंचांग के हिसाब से तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है जिसे अधिक मास कहा जाता है. पहले इस महीने को मलमास कहा जाता था. मल का मतलब गंदगी होता हैं इसलिए इसे मलमास कहते हैं. भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास बना दिया. तभी से यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है.

पुरुषोत्तम मास में क्या करें

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते इस महीने में सबसे ज्यादा भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए. अगर संभव हो तो भागवत कथा सुननी चाहिए और घर में भागवत ग्रंथ पढ़ना चाहिए. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी बहुत शुभ माना गया है. भगवान विष्णु को मालपुआ बेहद प्रिय है. ऐसे में कांसे के बर्तन में 33 मालपुए रखकर भगवान लक्ष्मी नारायण के सामने अर्पित करें. इसके बाद ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करें और भगवान से दुख-दरिद्रता दूर करने की प्रार्थना करें. फिर ये मालपुए जरूरतमंद लोगों में बांट दें. इसे बहुत पुण्यदायक माना गया है.

मलमास में क्या नहीं करना चाहिए

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं अधिक मास में शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. यह महीना पूरी तरह आध्यात्मिक साधना के लिए माना गया है. जो काम हमारे परलोक और पुण्य के लिए हों वही इस महीने में करने चाहिए. जितना ज्यादा जप, तप और भजन करेंगे उतना ही फायदा मिलेगा. इस मलमास में गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने दान-पुण्य करने और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए मान्यता है कि इस महीने में सच्चे मन से भगवान विष्णु की भक्ति करने से रुके हुए काम पूरे होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article