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Sourav Gangly match fixing talks: भारतीय क्रिकेट के सबसे कठिन दौर में कप्तानी संभालने वाले सौरव गांगुली ने मैच फिक्सिंग के विवादों पर बड़ा खुलासा किया है.दादा ने बताया कि कप्तान बनते ही उन्होंने सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ से सीधे पूछा था क्या वाकई कोई फिक्सिंग के लिए अप्रोच करता है? फिक्सिंग के साये से अनजान और दिग्गजों के सामने पहली मीटिंग में नर्वस गांगुली ने कैसे अपनी सूझबूझ से टीम का भरोसा जीता और भारतीय क्रिकेट को एक नई पहचान दी, यह कहानी उसी बदलाव की है.
सौरव गांगुली ने फिक्सिंग मुद्दे पर खुलकर बात की.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में साल 2000 एक ऐसा मोड़ था, जहां से टीम इंडिया का भविष्य या तो पूरी तरह बिखर सकता था या फिर एक नई उड़ान भर सकता था. क्रिकेट की दुनिया उस वक्त ‘मैच फिक्सिंग’ के काले साये में डूबी हुई थी. खेल की साख दांव पर थी और प्रशंसकों का भरोसा टूट चुका था. ऐसे कठिन और अनिश्चित समय में बंगाल के ‘महाराजा’ सौरव गांगुली ने टीम की कमान संभाली.
हाल में राज शमानी के पॉडकास्ट में सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने उन दिनों की यादें साझा कीं और बताया कि कैसे उन्होंने न केवल टीम को संभाला, बल्कि फिक्सिंग के उस खौफनाक दौर से अनजान रहते हुए क्रिकेट की पवित्रता को वापस लौटाया. गांगुली जब कप्तान बने, तब उनकी उम्र महज 27 साल थी. देश में फिक्सिंग को लेकर बवाल मचा था, लेकिन दादा (गांगुली) को इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि यह सब कैसे और क्यों हो रहा है. पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने एक दिलचस्प खुलासा किया. उन्होंने बताया कि वह खुद इस बात को लेकर उलझन में थे कि क्या वास्तव में कोई खिलाड़ियों को फिक्सिंग के लिए अप्रोच करता है.
सौरव गांगुली ने फिक्सिंग मुद्दे पर खुलकर बात की.
‘क्या तुम्हें कभी किसी ने फिक्सिंग के लिए अप्रोच किया?’
गांगुली ने कहा,’मुझे इन चीजों के बारे में कुछ पता नहीं था. मैं सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ से पूछता रहता था कि क्या वास्तव में ऐसा कुछ होता है? क्या तुम्हें कभी किसी ने इसके लिए अप्रोच किया?’ गांगुली ने सचिन से सीधे तौर पर पूछा था ‘तुझे किसी ने पूछा?’ सचिन का जवाब ‘ना’ में था. उन्होंने अनिल कुंबले से भी यही सवाल किया और उनका जवाब भी वही था. गांगुली के लिए यह राहत की बात थी कि टीम के मुख्य स्तंभ इन सब चीजों से दूर थे. उन्होंने साफ किया कि उस समय उनके दिमाग में फिक्सिंग का डर नहीं, बल्कि टीम को जीत की राह पर ले जाने का लक्ष्य था.
दिग्गजों के सामने पहली टीम मीटिंग का वो डर
सौरव गांगुली के लिए कप्तान के तौर पर शुरुआत करना आसान नहीं था. उन्हें उन खिलाड़ियों का नेतृत्व करना था, जिनकी कप्तानी में वह खुद खेल चुके थे. मोहम्मद अजहरुद्दीन और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज टीम का हिस्सा थे. गांगुली ने साझा किया कि कप्तान के रूप में पहली ड्रेसिंग रूम मीटिंग से पहले वह काफी घबराए हुए थे. उन्होंने अपनी पत्नी डोना से अपनी इस घबराहट का जिक्र करते हुए कहा था, ‘अजहर और सचिन मेरे कप्तान रह चुके हैं. मैं उन्हें कैसे बताऊंगा कि क्या करना है और क्या नहीं?’
गांगुली ने 15 मिनट में मिनट खत्म कर दी
कोच्चि में अपने पहले मैच की पूर्व संध्या पर गांगुली ने एक रणनीति अपनाई. उन्होंने तय किया कि वह मीटिंग को जितना हो सके छोटा रखेंगे. उन्होंने मात्र 15 मिनट में अपनी बात खत्म की और मैदान पर उतरने की तैयारी की. यह गांगुली की सूझबूझ ही थी जिसने उन्हें बड़े खिलाड़ियों के सामने सहज होने में मदद की. गांगुली की कप्तानी का जादू पहले ही मैच से दिखने लगा. कोच्चि में भारत ने जीत दर्ज की और अगले ही मैच में जमशेदपुर में गांगुली ने खुद शतक जड़ा. यहीं से भारतीय क्रिकेट में ‘दादा युग’ की शुरुआत हुई.
गांगुली के नेतृत्व में युवा प्रतिभाओं को मौका मिला
गांगुली ने अपनी कप्तानी में युवा खिलाड़ियों को टीम में मौका दिया जिनमें युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ, हरभजन सिंह और वीरेंद्र सहवाग शामिल थे.उन्होंने टीम को सिखाया कि विदेशों में जाकर कैसे आंखों में आंखें डालकर जीत दर्ज की जाती है. फिक्सिंग के साये से बाहर निकालने के लिए उन्होंने टीम में विश्वास का माहौल पैदा किया. सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को उस समय संभाला जब वह अपने सबसे निचले स्तर पर था. उन्होंने न केवल मैच फिक्सिंग के कलंक को धोया, बल्कि एक ऐसी टीम बनाई जिसने 2003 के विश्व कप फाइनल तक का सफर तय किया.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें


