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Sindoori Mango Ghazipur : गाजीपुर में इन दिनों सिंदूरी आम लोगों का ध्यान खींच रहा है. लाल रंग वाला यह खास आम 100 से 110 रुपये किलो तक बिक रहा है. इसका स्वाद खट्टा-मीठा है और गूदा काफी मुलायम. लोग इसे केमिकल से पकाए गए आमों से अलग मानते हैं. लोकल 18 से सौरभ बताते हैं कि उन्होंने पहली बार सिंदूरी आम को इतने करीब से देखा. नितेश यादव बताते हैं कि बाकी आमों के मुकाबले इसका दाम थोड़ा ज्यादा जरूर है, लेकिन स्वाद भी अलग है.
गाजीपुर. शहर के रिलायंस मार्ट में इन दिनों सिंदूरी आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. लालिमा लिए हुए छिलके और खट्टे-मीठे स्वाद वाला यह आम 100 से 110 रुपये किलो तक बिक रहा है. खास बात यह है कि दशहरी और लंगड़ा जैसे आमों के बीच अब लोग इस अलग दिखने वाले आम को भी ट्राय कर रहे हैं. लोकल 18 से रिलायंस मार्ट में खरीदारी करने पहुंचे सौरभ बताते हैं कि उन्होंने पहली बार सिंदूरी आम को इतने करीब से देखा. इसका लाल रंग काफी आकर्षित करता है. खाने में खट्टा-मीठा स्वाद और गूदा भी काफी अच्छा है. लग रहा है कि इसे किसी केमिकल से पकाया नहीं गया. गाजीपुर के बाजार में पहली बार इस तरह दिखा, इसलिए खरीदने का मन किया. ₹100 किलो मिल रहा है अभी.
नितेश यादव बताते हैं कि उन्होंने पिछली बार भी सिंदूरी आम खाया था, लेकिन बाजार में इसकी उपलब्धता कम थी. उनका कहना है कि इस बार ज्यादा दिख रहा है. स्वाद मीठा रहता है और इसका लाल छिलका अलग पहचान देता है. रोटी के साथ भी अच्छा लगता है. बाकी आमों के मुकाबले इसका दाम थोड़ा ज्यादा जरूर है, लेकिन स्वाद भी अलग है.
विटामिन का भंडार
सिंदूरी आम भारत की पारंपरिक आम किस्मों में गिना जाता है. इसका नाम इसके छिलके पर दिखने वाली ‘सिंदूर जैसी लालिमा’ के कारण पड़ा. यह आम सामान्यतः देर से पकने वाली किस्म माना जाता है और जब दशहरी या लंगड़ा का मौसम खत्म होने लगता है, तब बाजार में दिखाई देता है. न्यूट्रीशन का कोर्स कर चुकी निधि पाठक के अनुसार, सिंदूरी आम में Vitamin A, Vitamin C, एंटीऑक्सीडेंट्स और प्राकृतिक शर्करा अच्छी मात्रा में पाई जाती है. ये शरीर की इम्युनिटी आंखों और त्वचा के लिए लाभकारी है. फाइबर पाचन के लिए भी अच्छा माना जाता है, लेकिन सीमित मात्रा में सेवन करना बेहतर रहता है.
स्टोरेज में ज्यादा टिकाऊ
फल विक्रेताओं के अनुसार, सिंदूरी आम की बाहरी त्वचा अपेक्षाकृत मजबूत होती है, इसलिए यह कई दूसरी नाजुक किस्मों की तुलना में ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज में ज्यादा टिकाऊ माना जाता है. यही वजह है कि अब यह धीरे-धीरे बड़े बाजारों और अब यह आम बड़े बाजारों और मॉल की चमचमाती रैकों तक पहुंचने लगा है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


