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ब्रह्मोस, आकाश-NG, प्रलय की धार और होगी तेज, थरथर कांपेंगे चीन-पाकिस्‍तान – brahmos akash ng pralay missile DRDO develop Next Generation System

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ब्रह्मोस, आकाश-NG, प्रलय की धार और होगी तेज, थरथर कांपेंगे चीन-पाकिस्‍तान

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Next-Generation Missile Technology: मॉडर्न एज वॉर में चार चीजें काफी अहम हो गई हैं – फाइटर जेट, ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्‍टम. जिस देश के पास इन चारों का एडवांस वर्जन है, वह दुनिया का सबसे ताकतवर देश है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को ईरान और यूक्रेन जैसे देशों ने ड्रोन की ताकत से परेशान कर रखा है. वहीं, विश्‍व की दोनों महाशक्तियां आधुनिक मिसाइल के जरिये व्‍यापक पैमाने पर तबाही मचाई है. भारत के रक्षा वैज्ञानिक अब ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिससे स्‍वदेशी मिसाइल्‍स ज्‍यादा घातक बन जाएंगी.

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DRDO ऐसी टेक्‍नोलॉजी डेवलप की है, जिससे ब्रह्मोस, आकाश-NG, प्रलय जैसी मिसाइलें और ज्‍यादा घातक हो जाएंगी. (फाइल फोटो/Reuters)

Next-Generation Missile Technology: भारत मिसाइल टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है. अग्नि से लेकर ब्रह्मोस, प्रलय आदि इसके उदाहरण हैं. कम लागत वाली ड्रोन प्रणाली के वॉरगेम में आने के बाद अब मिसाइल को और भी अचूक बनाने पर फोकस किया जा रहा है. लंबी दूरी के साथ प्रिसिजन अटैक कैपेबेलिटी को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि दुश्‍मन बच न सके. पिछले दिनों ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने ब्रह्मोस से अटैक कर दुश्‍मन के संवदेनशील ठिकाने को निशाना बनाया था, जिसके बाद पाकिस्‍तान घुटने टेकते हुए शांति की भीख मांगने लगा था. ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक है. अब भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने ऐसी टेक्‍नोलॉजी डेवलप की है, जिससे मिसाइलों की क्षमता काफी बढ़ जाएगी. ये टेक्‍नोलॉजी अभी दुनिया के गिनेचुने देशों के ही पास है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों की इस सफलता से ब्रह्मोस, प्रलय, आकाश-NG जैसे मिसाइल सिस्‍टम और भी घातक हो जाएंगे, जिससे दुश्‍मन थरथर कांपेंगे.

हैदराबाद स्थित Defence Research and Development Organisation की प्रमुख प्रयोगशाला Defence Research and Development Laboratory ने अगली पीढ़ी की नेविगेशन और गाइडेंस इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है. यह अत्याधुनिक तकनीक भारतीय मिसाइल प्रणालियों की सटीकता, विश्वसनीयता और युद्धक्षमता को नई मजबूती देने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है. इस पहल को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, विकसित किया जा रहा यह इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज भविष्य की मिसाइल सिस्‍टम में बेहतर गाइडेंस और नेविगेशन क्षमता प्रदान करेगा. आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में मिसाइल की सटीकता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे लक्ष्य पर प्रभावी प्रहार सुनिश्चित होता है और अनावश्यक क्षति को कम किया जा सकता है. DRDL का उद्देश्य भारतीय मिसाइलों को ऐसे एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से लैस करना है, जो चुनौतीपूर्ण और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले वातावरण में भी प्रभावी प्रदर्शन कर सकें.

बढ़ेगी क्षमता

इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता स्वदेशी तकनीक पर विशेष जोर है. यह पहल केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अनुरूप है, जिसके तहत रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने और घरेलू तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस नई प्रणाली में उच्च विश्वसनीयता वाले स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक सिस्‍टम का उपयोग किया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज में गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित कंपोनेंट्स को शामिल किया जा सकता है. GaN तकनीक पारंपरिक सेमीकंडक्टर सामग्री की तुलना में अधिक ऊर्जा दक्षता, बेहतर थर्मल स्‍टेबिलिटी और अधिक टिकाऊ प्रदर्शन प्रदान करती है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के उपयोग से भारतीय मिसाइल प्रणालियों की कार्यक्षमता और प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा.

DRDO मिसाइल के लिए ऐसा गाइडेंस सिस्‍टम डेवलप करने में जुटा है, जिससे एक्‍यूरेसी काफी बढ़ जाएगी. आकाश जैसी मिसाइलें भी इससे अचूक बन जाएंगी. (फाइल फोटो/Reuters)

हाइपरसोनिक मिसाइलें होंगी और घातक

परियोजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू एडवांस सीकर टेक्‍नोलॉजी का समावेश है. माना जा रहा है कि इसमें अत्याधुनिक रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सीकर लगाए जाएंगे, जिनका परीक्षण पहले Akash NG जैसी प्रणालियों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है. ये सीकर मिसाइलों को लक्ष्य को अधिक सटीकता से पहचानने और ट्रैक करने में सक्षम बनाएंगे, यहां तक कि इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर परिस्थितियों में भी. इससे हाई-वैल्‍यू वाले और गतिशील लक्ष्यों को निष्क्रिय करने की क्षमता मजबूत होगी. यह तकनीक भविष्य में विकसित की जा रही हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की मिसाइल सिस्‍टम्‍स में भी उपयोग की जा सकती है. DRDL का मानना है कि नई पीढ़ी की मिसाइलों में गति, दूरी और सटीकता का संतुलन बनाना आने वाले समय की सामरिक आवश्यकता होगी. ऐसे में यह इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज भारतीय सशस्त्र बलों को रणनीतिक और सामरिक दोनों स्तरों पर अधिक प्रभावी क्षमता प्रदान करेगा.

चीन-पाकिस्‍तान का काल

वैश्विक रक्षा उद्योग में GaN आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत सीकर तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है. भारत द्वारा इन तकनीकों का स्वदेशी विकास देश को उन्नत रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स विकसित करने वाले अग्रणी देशों की श्रेणी में ला सकता है. यह पहल Defence Research and Development Organisation की हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल, लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल और क्वासी-बैलिस्टिक सिस्टम जैसी अन्य परियोजनाओं को भी तकनीकी मजबूती प्रदान करेगी. चीन-पाकिस्‍तान जैसे पड़ोसी देशों को देखते हुए भारत के लिए मॉडर्न डिफेंस टेक्‍नोलॉजी को अपनाना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्‍तान ब्रह्मोस की मार से इस कदर भयभीत हो गया था कि शांति वार्ता के लिए गुहार लगाने लगा था. ऐसे देशों को उसकी हद में रखने के लिए कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी वाले वेपन सिस्‍टम का होना बहुत जरूरी है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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