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2008 में दिल्ली बनाम उड़ीसा मैच में 130 ओवरों से भी कम के खेल में सभी 40 विकेट 15 गिर गए और मुकाबला महज दो दिनों में खत्म हो गया. दोनों टीमों के 15 ऐसे बल्लेबाज रहे जो अपना खाता भी मैच में खेल नहीं पाए. इस मैच में विराट कोहली गौतम गंभीर और मिथुन मन्हास अपना खाता भी नहीं खोल पाए थे.
2008 के रणजी मैच में 15 बल्लेबाज हुए थे 0 पर आउट. विराट गंभीर भी नहीं खोल पाए थे खाता
नई दिल्ली. साल 2008 क्रिकेट इतिहास का वो हैरान करने वाला मैच खेला गया जिसमें बना रिकॉर्ड आज के बड़े बड़े दिग्गजों को मुंह चिढ़ाता है. दिल्ली के तब कोटला के मैदान पर जब उड़ीसा की टीम दिल्ली के खिलाफ खेलने उतरी, तो दिल्ली के पास वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, विराट कोहली, आकाश चोपड़ा और मिथुन मनहास जैसी दिग्गजों से सजी बल्लेबाजी लाइन-अप थी लेकिन कोटला की पिच पर बिछी हरी घास ने ऐसी तबाही मचाई कि दोनों टीमों का बल्लेबाजी क्रम हिल गया.
130 ओवरों से भी कम के खेल में सभी 40 विकेट गिर गए और मुकाबला महज दो दिनों में खत्म हो गया.
पहली पारी में बल्लेबाजी करने उतरी दिल्ली की टीम सिर्फ 78 रनों पर सिमट गई. उड़ीसा के तेज गेंदबाजों देबाशीष मोहंती, बसंत मोहंती और सुकांत खटुआ ने ऐसी स्विंग और सीम गेंदबाजी की कि दिल्ली का कोई भी स्टार बल्लेबाज टिक नहीं सका. मजे की बात ये रही कि दोनों टीमों के 15 ऐसे बल्लेबाज रहे जो अपना खाता भी मैच में खेल नहीं पाए.
जब कोहली हुए ‘गोल्डन डक’ और गंभीर को लगा ‘पेयर’
इस मैच का सबसे हैरान करने वाला पहलू दिल्ली के महान बल्लेबाजों का शून्य पर आउट होना था. उस समय महज 20 साल के युवा विराट कोहली पहली पारी में गोल्डन डक (पहली ही गेंद पर शून्य) का शिकार बने. हालांकि दूसरी पारी में उन्होंने संभलकर 16 रन बनाए. वहीं मौजूदा टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के लिए यह मैच किसी दुःस्वप्न जैसा रहा. वह दोनों पारियों में खाता खोले बिना (0 और 0) पवेलियन लौट गए जिसे क्रिकेट की भाषा में ‘अ पेयर’ (A Pair) कहा जाता है. अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर कप्तान वीरेंद्र सहवाग भी इस हरी पिच पर संघर्ष करते दिखे. वह पहली पारी में सिर्फ 17 रन और दूसरी पारी में 32 रन ही बना सके.
ईशांत शर्मा का कहर और सुमित नरवाल की जादुई पारी
दिल्ली की टीम भले ही पहली पारी में 78 रन पर सिमट गई थी, लेकिन उनके पास भी ईशांत शर्मा जैसा खूंखार तेज गेंदबाज था. ईशांत ने उड़ीसा के बल्लेबाजों पर कहर बरपाते हुए पहली पारी में 24 रन देकर 7 विकेट झटके. इसके जवाब में उड़ीसा की टीम भी पहली पारी में महज 80 रनों पर ढेर हो गई. दूसरी पारी में भी दिल्ली की हालत खस्ता थी, लेकिन नंबर 9 पर आए सुमित नरवाल ने मैच का पासा पलट दिया। नरवाल जब 16 रन पर थे, तब उनका एक आसान सा कैच छूटा.इस जीवनदान का फायदा उठाकर उन्होंने 66 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली, जिसने दिल्ली को दूसरी पारी में 150 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया. 149 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी उड़ीसा की टीम दूसरी पारी में सिर्फ 96 रन पर ऑलआउट हो गई और दिल्ली ने यह मैच 52 रनों से जीत लिया. क्रिकेट के रिकॉर्ड्स खंगालने पर पता चलता है कि भारत में किसी फर्स्ट-क्लास मैच में इतने ज्यादा डक दर्ज होने का यह इतिहास में सिर्फ दूसरा मौका था.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


