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अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति द्वारा गुरनूर बरार को टीम इंडिया में शामिल करना एक ऐसा ही फैसला माना जा रहा है. गुजरात टाइटंस के इस खिलाड़ी को आईपीएल 2026 के इस सीजन में अपनी फ्रेंचाइजी के लिए एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला, फिर भी उन्हें राष्ट्रीय टीम का टिकट मिल गया. यह घटना ठीक वैसी ही है जैसा तीन दशक पहले 1996-97 के वेस्टइंडीज दौरे पर हुआ था, जिसने भारतीय क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया था.
2026 में गुरनुर बरार के सेलेक्शन ने 1996 में नोएल डेविड के चयन की कहानी दोहरा दी.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम में चौंकाने वाले चयन और उस पर होने वाले विवादों का इतिहास काफी पुराना है. हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली आगामी सीरीज के लिए पंजाब के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को टेस्ट और वनडे टीम में शामिल किए जाने पर क्रिकेट गलियारों में काफी बहस छिड़ गई है. इस चयन ने फैंस और दिग्गजों को सीधे साल 1996 के उस दौर की याद दिला दी है, जब वेस्टइंडीज दौरे के बीच नोएल डेविड का नाम अचानक सामने आया था और तत्कालीन कप्तान सचिन तेंदुलकर भी हैरान रह गए थे.
क्रिकेट में टीम का चयन हमेशा से ही प्रदर्शन,रणनीति और प्रतिभा के आकलन पर निर्भर करता है लेकिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ चयन ऐसे भी रहे हैं जो आंकड़ों के तर्क से परे, सीधे विवादों के केंद्र में जा गिरे. वर्तमान में अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति द्वारा गुरनूर बरार को टीम इंडिया में शामिल करना एक ऐसा ही फैसला माना जा रहा है. गुजरात टाइटंस के इस खिलाड़ी को आईपीएल 2026 के इस सीजन में अपनी फ्रेंचाइजी के लिए एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला, फिर भी उन्हें राष्ट्रीय टीम का टिकट मिल गया. यह घटना ठीक वैसी ही है जैसा तीन दशक पहले 1996-97 के वेस्टइंडीज दौरे पर हुआ था, जिसने भारतीय क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया था.
1996 का वो ऐतिहासिक विवाद कौन नोएल डेविड?
साल 1996-97 में सचिन तेंदुलकर के हाथों में भारतीय टीम की कमान थी. वेस्टइंडीज के कड़े दौरे पर भारत के मुख्य तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ चोटिल होकर बाहर हो गए कैरेबियाई पिचों और वहां के खब्बू (लेफ्ट-हैंडर) बल्लेबाजों को देखते हुए कप्तान तेंदुलकर ने बोर्ड से एक अतिरिक्त ऑफ-स्पिनर की मांग की थी. सचिन ने स्पष्ट तौर पर बड़ौदा के तुषार आरोठे या हैदराबाद के कंवलजीत सिंह को भेजने की सिफारिश की थी, जिनका घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड था लेकिन तत्कालीन बीसीसीआई सचिव जयवंत लेले और चयन समिति ने कप्तान की पसंद को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया. फैक्स के जरिए जब टीम को सूचना मिली, तो उसमें हैदराबाद के गुमनाम खिलाड़ी नोएल डेविड का नाम शामिल था. कहा जाता है कि इस नाम को सुनकर सचिन तेंदुलकर बेहद हैरान हुए थे और कथित तौर पर उनके मुंह से निकला था “नोएल कौन?” डेविड ने भारत के लिए महज 4 वनडे मैच खेले और जल्द ही वह अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य से गायब हो गए. यह चयन इस बात का सबसे बड़ा सबूत था कि चयनकर्ता अक्सर कप्तान की रणनीतिक मांग से अलग अपनी दिशा में सोचते थे.
गुरनूर बरार के चयन पर क्यों मचा है बवाल?
आज ठीक वैसा ही माहौल गुरनूर बरार को लेकर बना हुआ है. अफगानिस्तान सीरीज के लिए जब भारतीय टीम का ऐलान हुआ, तो सबसे बड़ा सरप्राइज गुरनूर का नाम था सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि गुजरात टाइटंस ने गुरनूर को ₹1.30 करोड़ में रिटेन तो किया, लेकिन मौजूदा सीजन में उन्हें एक भी मैच की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं दी. जिस खिलाड़ी को अपनी राज्य स्तरीय फ्रेंचाइजी खेलने लायक नहीं समझ रही थी, उसे सीधे भारत की लाल और सफेद गेंद की टीम में चुन लिया गया. इस चयन पर बवाल इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि रणजी ट्रॉफी में रिकॉर्ड तोड़ 60 विकेट लेने वाले जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को चयनकर्ताओं ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया.
पूर्व क्रिकेटर्स की आपत्ति
मदन लाल और आकाश चोपड़ा जैसे पूर्व क्रिकेटरों ने भी इस फैसले पर खुले तौर पर सवाल उठाए हालाँकि, पूर्व चयनकर्ता सबा करीम का मानना है कि गुरनूर को उनके ‘इंडिया ए’ के अनुभव और उनकी 6.5 फीट की लंबाई से मिलने वाले अतिरिक्त बाउंस व रफ्तार के कारण आकिब पर तरजीह दी गई है. 1996 में नोएल डेविड का चयन चयनकर्ताओं की तानाशाही और कप्तान की अनदेखी का प्रतीक बन गया था आज गुरनूर बरार का चयन डेटा, आईपीएल बेंच-स्ट्रेंथ और घरेलू प्रदर्शन के बीच की रस्साकशी को दिखाता है. इतिहास गवाह है कि ऐसे ‘सरप्राइज’ चयन या तो किसी खिलाड़ी को फर्श से अर्श पर ले जाते हैं या फिर नोएल डेविड की तरह इतिहास के पन्नों में गुम कर देते हैं.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


