carrot को उसके प्राकृतिक रूप में ही अर्थात कच्चा खाने से ज्यादा लाभ होता है।
उसके भीतर का पीला भाग निकाल कर खाना चाहिए क्योंकि वह अत्यधिक गर्म होता है, अतः पित्त, वीर्यदोष एवं छाती में दाह उत्पन्न करता है।
carrot स्वाद में मधुर-कसेली-कड़वी, तीक्ष्ण, स्निग्ध, उष्ण वीर्य, गरम, दस्त ठीक करनेवाली, मूत्रल, ह्रदय के लिए हितकर, रक्त शुद्ध करनेवाली, कफ निकालने वाली, वातदोषनाशक, पुष्टिवर्धक तथा दिमाग एवं नस-नाड़ियों के लिए बलप्रद है।
यह अफरा संग्रहणी, बवासीर, पेट के रोगों, सूजन, खासी, पथरी, मूत्रदाह, मुत्रालप्ता तथा दुर्बलता का नाश करने वाली है।
गाजर के बीज गर्म होते हैं रूसी डॉ. मेकनिकोफ के अनुसार carrot मैं आंतों के हानिकारक जंतुओं को नष्ट करने का अद्भुत गुण पाया जाता है।
इसमें विटामिन ‘ ए ‘ भी काफी मात्रा में पाया जाता है, अतः यह नेत्ररोग में भी लाभदायक है।
रूसी डॉ. मेकनिकोफ के अनुसार carrot मैं आंतों के हानिकारक जंतुओं को नष्ट करने का अद्भुत गुण पाया जाता है।
इसमें विटामिन ‘ ए ‘ भी काफी मात्रा में पाया जाता है, अतः यह नेत्ररोग में भी लाभदायक है।
गाजर रक्त शुद्धि करती है। 10-15 दिन तक केवल carrot के रस प्र रहने से रक्तविकार, गांठ, सूजन एवं पंडुरोग जैसे त्वचा के रोगों में लाभ होता है।
इसमें लौह – तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। खूब चबाकर carrot खाने से दांत मजबूत, स्वच्छ एवं चमकदार होते हैं तथा मसूड़े मजबूत बनते है।
सावधानी :
अत्यधिक मात्रा में गाजर खाने से पेट में दर्द होता है। ऐसे समय में थोड़ा गुड़ खायें। अधिक carrot वीर्य का क्षय करती है। पित्तप्रक्रती के लोगो को गाजर काम एवं सावधानी पूर्वक उपयोग करना चाहिए।
औषधि प्रयोग :
१. दिमागी कमजोरी : carrot के रस का नित्य सेवन करने से दिमागी कमजोरी दूर होती है।
२. सूजन : सब आहार त्याग कर केवल carrot के रस अथवा उबली हुई गाजर पर रहने से मरीज को लाभ होता है।
३. मासिक न दिखने पर या कष्टातर्व : मासिक कम आने पर या समय होने पर भी ना आने पर carrot के 5 ग्राम बीजों को 20 ग्राम गुड़ के साथ काढ़ा बनाकर लेने से लाभ होता है। एलोपैथिक गोलियां जो मासिक को नियमित करने के लिए ली जाती है वह अत्यधिक हानिकारक होती है। भूल से भी इनका सेवन ना करें।
४. आधासीसी : गाजर के पत्तों पर दोनों और घी लगाकर उन्हें गर्म करें। फिर उनका रस निकाल कर दो तीन बूंदे कार एवं नाक में डालें। इससे अधसीसी (अधा सर ) का दर्द मिटता है।
५. श्वास – हिचकी : गाजर के रस की 4 5 बूंदे दोनों नथुनों में डालने से लाभ होता है।
६. नेत्ररोग : दृष्टिमंदता, रतौंधी, पढ़ते समय आंखों में तकलीफ होना आदि रोगों में कच्ची गाजर या उसके रस का सेवन लाभप्रद है। या प्रयोग चश्मे का नंबर घटा सकता है।
७. पाचन संबंधी गड़बड़ी : अरुचि, मंदाग्नि, अपच आदि रोगों में गाजर के रस में नमक, धनिया, जीरा, काली मिर्च, नींबू का रस डालकर पीये अथवा गाजर का सूप बनाकर पिये।
८. पेशाब की तकलीफ : गाजर का रस पीने से पेशाब खुलकर आता है रक्त शर्करा भी कम होती है। गाजर का हलवा खाने से पेशाब में कैल्शियम, फास्फोरस का आना बंद हो जाता है।
९. जलने पर : जलने से होने वाले दाह में प्रभावित अंग पर बार-बार गाजर का रस लगाने से लाभ होता है।
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