रामपुर: रामपुर में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद वोटरों के आंकड़ों ने सियासी माहौल को गरमा दिया है. यह वही रामपुर है, जिसे लंबे समय से सपा नेता मोहम्मद आजम खान का गढ़ माना जाता रहा है. ऐसे में जब आंकड़ों में बड़ा बदलाव सामने आया, तो चर्चा होना लाजमी है.
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के मुताबिक, एसआईआर की प्रक्रिया 28 अक्टूबर से शुरू हुई थी और सभी चरण पूरे करने के बाद 10 अप्रैल को फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी गई. उन्होंने बताया कि एसआईआर से पहले जिले में करीब 17 लाख 57 हजार वोटर थे. लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2 लाख से ज्यादा नाम सूची से हट गए. अब जिले में कुल वोटरों की संख्या 15 लाख से थोड़ा ज्यादा रह गई है.
तहसील में सबसे ज्यादा आए नए आवेदन
प्रशासन के अनुसार, सबसे ज्यादा वोटों की कटौती सदर तहसील में हुई है. यही नहीं, इसी तहसील में सबसे ज्यादा नए आवेदन यानी फार्म-6 भी आए हैं. डीएम का कहना है कि जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उनमें वे लोग शामिल हैं, जो अब रामपुर में नहीं रह रहे. कुछ नाम डुप्लीकेट थे और कुछ ऐसे लोग थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है.
बड़े स्तर पर हटाए गए नाम
दूसरी तरफ सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है. सपा के लोकसभा उपचुनाव के पूर्व प्रत्याशी आसिम राजा ने इस पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि सदर तहसील में सबसे ज्यादा वोट कटे हैं, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हुआ कि किस आधार पर इतने बड़े स्तर पर नाम हटाए गए. उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में एसआईआर हुआ है, वहां इसकी विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं.
उनका यह भी कहना है कि जिन लोगों के नाम कटे हैं, उन्हें दोबारा मौका मिलना चाहिए, ताकि वे अपना नाम जुड़वा सकें. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी सिस्टम अपनी गलती मानने के बजाय जिम्मेदारी जनता पर डाल देता है.
सभी दलों को असर
आम लोगों में भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. स्थानीय निवासी जाहिद हिंदुस्तानी का कहना है कि यह केवल एक पार्टी का नुकसान नहीं है, बल्कि इससे सभी दलों को असर पड़ेगा. उनके मुताबिक अगर प्रक्रिया सही तरीके से होती, तो इतने बड़े स्तर पर वोट नहीं कटते. वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा कि उनका वोट तो बना रहा, लेकिन उनके बेटे का नाम सूची में नहीं आया, जिससे यह साफ है कि दिक्कतें हर वर्ग को हो रही हैं.
एसआईआर में फर्जी वोट हटे
दूसरी ओर कुछ लोग इस प्रक्रिया का समर्थन भी कर रहे हैं. फरहत अली खान का कहना है कि एसआईआर में फर्जी वोट हटे हैं, जिससे चुनाव और पारदर्शी होंगे. उनका मानना है कि इससे असली वोटर की अहमियत बढ़ेगी और बेहतर प्रतिनिधि चुना जा सकेगा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इससे रामपुर की सियासत में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं आएगा.
एसआईआर में वोट कटौती को बताया साजिश
वहीं सपा समर्थक राजा का कहना है कि मुस्लिम इलाकों में ज्यादा वोट काटे गए हैं, जो गलत है. उन्होंने इसे साजिश करार देते हुए कहा कि इसका असर जरूर पड़ेगा, लेकिन उनकी पार्टी को बड़ा नुकसान नहीं होगा. कुल मिलाकर देखा जाए तो रामपुर जो आजम खान का मजबूत सियासी गढ़ रहा है, वहां वोटरों के इन बदले आंकड़ों ने नई बहस छेड़ दी है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में ये बदलाव किस दिशा में असर डालेंगे और किसके लिए फायदेमंद साबित होंगे. फिलहाल प्रशासन इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहा है, जबकि सियासत में इसे लेकर बयानबाजी तेज है.


