अंजीर खाने के फायदे-Benefits of eating figs

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अंजीर figs के पाई जाती है लाल काली सफेद और पीले-पके हुए अंजीर का मुरब्बा बनता है,अधिक मात्रा में अंजीर खाने से यकृत को नुकसान हो सकता है।

गुणधर्म :

पके, ताजे अंजीर figs गुण में शीतल, स्वाद में मधुर, स्वादिष्ट एवं पचने में भारी होते हैं।

यह वायु एवं पित्त दोष का शमन एवं रक्त की वृद्धि करते हैं। यह रस एवं विभाग मैं मधुर एवं शीत वीर्य होते हैं।

भारी होने के कारण कफ, मंदाग्नि एवं आमवात के रोगों की वृद्धि करते हैं। यह कृमि, हृदय पीड़ा रक्तपित्ता दाह एवं रक्त विकार नाशक है।

ठंडे होने के कारण नकसीर फूटने में, पित्त के रोगों में एवं मस्तक के रोगों में विशेष लाभप्रद होते हैं।

अंजीर में विटामिन ‘ ए ‘ होता है जिससे वह आंख के कुदरती गीलेपन को बनाए रखता है।

सूखे अंजीर में उपर्युक्त गुणों के अलावा शरीर को स्निग्ध करने, वायु की गति को ठीक करने एवं श्वास के रोग का नाश करने के गुण भी विद्यमान होते हैं।

अंजीर को बादाम एवं पिस्ता के साथ खाने से बुद्धि बढ़ती है और अखरोट के साथ खाने से विष – विकार नष्ट होता है।

किसी बालक ने कांच, पत्थर अथवा ऐसी कोई भी अखाघ ठोस वस्तु निगल ली हो तो उसे रोज एक से दो अंजीर खिलाएं। इससे वह वस्तु मल के साथ बाहर निकल जाएगी। अंजीर चबाकर खाना चाहिए।

मात्रा :

2 से 4 अंजीर figs खाये जा सकते हैं। भारी होने से इन्हें ज्यादा खाने पर सर्दी, कफ एवं मंदाग्नि हो सकती है।

औषधि प्रयोग :

  • रक्त की शुद्धि व वृद्धि : 3-4 नग अंजीर figs को 200 ग्राम दूध में उबालकर रोज पीने से रक्त की वृद्धि एवं शुद्धि, दोनों होती हैं। इससे कब्जियत भी मिटती है।
  • रक्त स्राव : कान, नाक, मुंह आदि से रक्त स्राव होता हो तो 5-6 घंटे तक दो अंजीर भिगोकर रखें और पीसकर उसमें दूर्वा का 20 से 25 ग्राम रस और 10 ग्राम मिश्री डालकर सुबह शाम की है।
    ज्यादा रक्तस्राव हो तो खस एवं धनिया के चूर्ण को पानी में पीसकर ललाट पर एवं हाथ पैर के तलवों पर लेप करें। इससे लाभ होता है।
  • मंदाग्नि एवं उदर रोग : जिनकी पाचन शक्ति बंद हो दूध ना पछता हो उन्हें दो से चार अंजीर रात्रि में पानी में भिगोकर सुबह चबा कर खाना चाहिए एवं वही पानी पी लेना चाहिए।
  • कब्जियत : प्रतिदिन 5 से 6 अंजीर के टुकड़े करके 250 मि.ली. पानी में भिगो दें। सुबह उस पानी को उबालकर आधा कर दें और पी जाएं। पीने के बाद अंजीर चबाकर खाएं तो थोड़े ही दिनों में कब्जियत दूर होकर पाचन शक्ति बलवान होगी। बच्चों के लिए 1 से 3 अंजीर पर्याप्त है।
  • आधुनिक विज्ञान के मतानुसार अंजीर बालकों की कब्जियत मिटाने के लिए विशेष उपयोगी है।
  • कब्जियत के कारण जब मल आंतों में सड़ने लगता है, तब उसके जहरीले तत्व रक्त में मिल जाते हैं और रक्त वाही धमनियों में रुकावट डालते हैं जिससे शरीर के सभी अंगों में रक्त नहीं पहुंचता।
  • इसके फल स्वरूप शरीर कमजोर हो जाता है तथा दिमाग, नेत्र, ह्रदय, जठर, बड़ी आंत आदि अंगों में रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
  • शरीर दुबला-पतला होकर जवानी में ही वृद्धत्व नजर आने लगता है। ऐसी स्थिति में अंजीर का उपयोग अत्यंत लाभदायक होता है। यह आंतों की शुद्धि करके रक्त बढ़ाता है एवं रक्त-परिभ्रमण को सामान्य बनाता है।
  • बवासीर : दो से चार अंजीर रात को पानी में भिगोकर सुबह खाएं और सुबह भिगोकर शाम को खाएं। इस प्रकार प्रतिदिन खाने से खूनी बवासीर मैं लाभ होता है। अथवा अंजीर, काली द्राक्ष, हरड़ एवं मिश्री को समान मात्रा में लें। फिर उन्हें कूटकर सुपारी जितनी बड़ी गोली बना ले। प्रतिदिन सुबह-शाम एक-एक गोली का सेवन करने से भी लाभ होता है।
  • बहुमूत्रता : जिन्हें बार-बार ज्यादा मात्रा में ठंडी व सफेद रंग का पेशाब आता हो, कंठ सूखता हो, शरीर दुर्बल होता जा रहा हो तो, रोज प्रातः काल दो से चार अंजीर खाने के बाद ऊपर से 10 से 15 ग्राम काले तिल चबाकर खाएं। इससे आराम मिलता है।
  • मूत्र अल्पता : एक या दो अंजीर में एक या दो ग्राम कलमी सोडा मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाने से मूत्र अल्पता में लाभ होता है।
  • श्वास (गर्मी का दमा) : 6 ग्राम अंजीर एवं 3 ग्राम गोरख इमली का चूर्ण सुबह-शाम खाने से लाभ होता है। श्वास के साथ खांसी भी हो तो इसमें जीरे का चूर्ण मिलाकर लेने से ज्यादा लाभ होगा।
  • कृमि : अंजीर रात में भिगो दें, सुबह खिलाएं। इससे 2-3 दिन में ही लाभ होता है।
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