परिश्रम- एक राजा के राज वैद्य ने एक दिन राजा को बताया,
कि जनवरी मास की कड़ाके की सर्दी में अगर आदमी को ठंडे पानी से रात 12 बजे स्नान कराकर उसे दही और चावल खिला दिया जाए तो उसकी मृत्यु हो जाएगी।
राजा ने यह बात अपने मंत्री को बता दी।
मंत्री ने वैध जी को बुलाकर राजा के सामने शर्त रखी,
यदि वह आदमी नहीं मारा तो तुम्हें मृत्यु दंड मिलेगा और यदि मर गया तो उसका उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
वेद नहीं है शर्त स्वीकार कर ली।
वाह मंत्री 1 ग्राम में गया था तथा एक किसान को देखा, वह भीषण सर्दी में रात के समय खेत में पानी लगा रहा है।
मंत्री उस किसान को राजा के पास लाया। रात के समय ठंडे पानी से स्नान कराकर उसे दही चावल खिलाया।
उस किसान को कुछ नहीं हुआ। अब तो शर्त के अनुसार वेद को मृत्युदंड दे दिया गया।
वेद का पुत्र बड़ा हो गया उसने भी पुस्तकों का अध्ययन किया तथा राजा से कहा कि आपने मेरे पिताजी को मृत्युदंड दिया है,
वह अनुचित है।
मेरे पिताजी ने सही बात बताई थी आपको। राजा ने मंत्री को बुलाकर यह बात बताई।
मंत्री बोला – इसका निर्णय आपके सामने कर दिया जाए। मंत्री फिर उसी गांव के एक किसान को लेकर आया।
वैद्य ने कहा कि यह भी उसी गांव का आदमी है। वेद के पुत्र ने कहा – यह आदमी नहीं है, मैं इसे 3 माह में आदमी बनाऊंगा।
मंत्री इस बात पर तैयार हो गया। अब उसी आदमी को आलीशान महल में रखा।
मुलायम वस्त्र पहनाए, सुंदर मखमली गधों पर सुलाया और उससे काम नहीं करवाया। उसका शरीर पीला पड़ गया।
1 दिन उसके बिस्तर के नीचे चने के दाने बिछा दिए, उसे नींद नहीं आई।
अब वह आदमी बन चुका था। वेद के पुत्र ने रात को ठंडे पानी से स्नान करा उसे दही चावल खिलाएं।
थोड़ी देर बाद उसे पीड़ा हुई और अपना शरीर त्याग दिया। वेद के पुत्र को उचित इनाम दिया गया।
कहा भी गया है की आलस्य मृत्यु का प्रतीक है-परिश्रम
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