जानिए पूरे विश्व में बनाए जाने वाले mothers days के बारे में
मदर्स डे हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।mothers days का दिन पूरे विश्व में मां के लिए समर्पित है। मदर्स डे पूरे विश्व में बच्चों के लिए छात्रों के लिए सबसे अच्छा दिन है। हम सभी जानते हैं कि मां हमारे लिए सर्वोपरि है।
मदर्स डे के जरिए पूरे विश्व में हम अपनी मां का इस आभार प्रकट करते हैं। यह एक ऐसा दिन है जो जिसे सभी बच्चे अपनी मां के लिए खास तौर से मनाते हैं।
इस दिन बच्चे मां को खुश करने के लिए ग्रीटिंग कार्ड्स, विशिंग कार्ड,एवं अन्य तोहफे देकर मां का आभार प्रकट करते हैं। इस दिन घर में अच्छे-अच्छे पकवान बनते हैं और घर के सभी सदस्य मिलकर इस मौके का लुफ्त उठाते हैं।
इस दिन को अच्छी तरह से बनाने के लिए मां और बच्चे मिलकर डांस करते हैं,बच्चे मां से केक कटवाते हैं, एवं मां को गिफ्ट देते हैं।
मां सभी बच्चों की एक बहुत अच्छी दोस्त होती है क्योंकि सभी की मां अपने बच्चों की छोटे से छोटे जरूरत का ख्याल रखती है।
मां के बिना हम 1 दिन भी नहीं रह सकते। मां हमारी हर चीज का ख्याल रखती है। अगर हम खुश होते हैं तो मां भी खुश होती है।
अगर हम परेशान होते हैं तो मां भी दुखी हो जाती है। पूरी दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं है जो मां की बराबरी कर सके।
मां के बराबर अपने बच्चों का ख्याल रख सके।मां अपने बच्चों को कभी अकेला नहीं छोड़ती। इसीलिए साल में 1 दिन मां को आभार और आदर प्रकट करने के लिए सभी बच्चे मदर्स डे मनाते हैं।
हमारे लिए हर वक्त तैयार रहती है।हमारे जन्म से लेकर हमारे अंतिम समय तक मां हमारे साथ रहती है।अब हमारी हर छोटी से छोटी जरूरत का ख्याल रखती है।
मां के एहसानों का हम जीवन में कभी भी वर्णन नहीं कर सकते। कभी अपनी मां का कर्ज नहीं उतार सकते।
मां के पास घर की सारी जिम्मेदारियां होती हैं जिन्हें वह समय पर अच्छे से निभाती हैं।
मां अकेली दुनिया में एक ऐसी इंसान है जिनके काम करने का कोई भी समय निश्चित नहीं होता। हम मां की योगदानों का कभी आभार प्रकट नहीं कर सकते ।
हां मां को हम धन्यवाद जरूर कह सकते हैं, उन्हें सम्मान दे सकते हैं और उनका ध्यान रख सकते हैं।
सबसे पहले मदर्स डे कहां मनाया गया?
सबसे पहले मदर्स-डे अमेरिका में प्रोक्लॉमेशन जुलिया वॉर्ड होवे द्वारा मनाया गया था।
एना जॉर्विस ने 1912 में सेकंड संडे इन मई फॉर ‘mothers days’ को ट्रेडमार्क बनाया और मदर डे इंटरनेशनल एसोसिएशन का गठन किया।
उसके बाद से हर साल mothers days मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।
सुरक्षा कवच बनी मां-
मां हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह होती है क्योंकि मां हमारे हर सुख-दुख,हर परेशानी का ख्याल रखती है। मां हमें कभी भी परेशान नहीं होने देती।
बच्चों के मन की बात समझने से लेकर बच्चों की हर जरूरत का ख्याल मां रखती है। बच्चों की तबीयत खराब होने पर मां खुद डॉक्टर बन जाती है।
बच्चा पढ़ाई न कर पाए तो मां उसकी टीचर ही बन जाती है। बच्चों की खुशियों के लिए मां हर किसी से लड़ जाती है।
मां अपनी इच्छाओं को मारकर बच्चों की ख्वाहिशें पूरी करती है।
मां के पास होता है बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज
मां को सबसे ज्यादा अपने बच्चों की सेहत की फिक्र रहती है। मां का मन बच्चों की सेफ्टी और उनकी तबीयत को लेकर सहमा रहता है।
बड़ी से बड़ी बीमारी से लड़ जाने वाली मां, बच्चों की थोड़ी सी तबीयत खराब होने पर परेशान हो जाती है।
अब जब हर जगह इंफेक्शन का खतरा बना हुआ है तो ऐसे में मां की चिंता और भी बढ़ गई है।
कोरोना संक्रमण फैलने की वजह से देश की ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की मां अपने बच्चों की सेहत के लिए परेशान है और डरी हुई है। पर मां तो मां होती है।
डर के बाद भी मां अपने बच्चों का ख्याल रखने में कोई कसर नहीं छोड़ती है।
आजकल मां अपने बच्चों के खान-पान पर बहुत ध्यान दे रही है एवं उनकी इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए तरह-तरह के नुस्खे भी आजमा रही है।
बच्चों को काढ़ा बनाकर पिलाना हो या घर का खाना खिलाना हो, मां बच्चों की सेहत के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास कर रही है।
मां अपने बच्चों को बहुत प्यार करती है और हमेशा उनकी हिफाजत करती है।
सुरक्षा कवच होती है मां
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