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ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि यह युद्ध ईरान के ‘परमाणु बम’ बनाने के कार्यक्रम को रोकने के लिए है. पलटवार करते हुए ईरान ने गाजा, लेबनान और इराक में अमेरिका-इजरायल की कार्रवाइयों को ‘अमानवीय और अनैतिक’ करार दिया है.
पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन को ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं. (फाइल फोटो)
तेहरान. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल को सीधी चुनौती देते हुए जंग खत्म करने के लिए अपनी शर्तें सामने रख दी हैं. 21 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच हुई बातचीत में तेहरान ने साफ कर दिया कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने हमले तुरंत बंद नहीं करते और भविष्य में दोबारा ऐसा न करने की गारंटी नहीं देते, तब तक शांति संभव नहीं. ईरान ने इस टकराव के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उनकी ‘आक्रामक सैन्य कार्रवाई’ ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है.
इस बीच पीएम मोदी ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए क्षेत्र में अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमलों की निंदा की. उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के हमले न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं. भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता समुद्री रास्तों की सुरक्षा है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जहां से देश के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा गुजरता है.
ईरान ने इस मौके पर एक बड़ा जियोपॉलिटिकल दांव भी खेला. राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पश्चिम एशियाई देशों के बीच एक रीजनल सिक्योरिटी फ्रेमवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसमें बाहरी ताकतों की कोई दखल न हो. उन्होंने उम्मीद जताई कि BRICS जैसे मंच इस संकट को खत्म करने में स्वतंत्र भूमिका निभा सकते हैं. साथ ही, ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह संघर्ष ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकने के लिए है. तेहरान ने दोहराया कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है.
ईरान ने पलटवार करते हुए इजरायल पर लेबनान, गाजा और इराक जैसे क्षेत्रों में हमलों और हत्याओं का आरोप लगाया और अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई को ‘अमानवीय और अनैतिक’ करार दिया. पेजेश्कियन का संदेश साफ है – ईरान अब झुकने को तैयार नहीं है. अगर शर्तें नहीं मानी गईं, तो यह टकराव और भड़क सकता है, जिसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें




