गर्मी से पहले जई का चारा देगा दुधारू पशुओं को ताकत, जानिए विशेषज्ञों की सलाह

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जई का चारा खिलाने से दूध में फैट की मात्रा में उल्लेखनीय सुधार होता है. उनके अनुसार, जई में मौजूद पोषक तत्व पशुओं के चयापचय पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं. इससे उनके शरीर में ऊर्जा का स्तर बना रहता है. जई का चारा सुपाच्य होने के कारण पशुओं के लिए बेहद लाभकारी है.

सीतामढ़ी: मार्च और अप्रैल का महीना पशुपालन के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान उपलब्ध हरा चारा न केवल दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है, बल्कि यह दूध की गुणवत्ता सुधारने का भी महत्वपूर्ण समय होता है. खासकर जई का चारा इस मौसम में पशुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता. कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और आवश्यक खनिज तत्वों से भरपूर जई का सेवन गाय और भैंसों के पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय जई के चारे का सही प्रबंधन करने से पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होती है.

जई से बढ़ता है दूध का फैट
क्षेत्र के प्रगतिशील पशुपालक कौशल किशोर यादव का कहना है कि जई का चारा खिलाने से दूध में फैट की मात्रा में उल्लेखनीय सुधार होता है. उनके अनुसार, जई में मौजूद पोषक तत्व पशुओं के चयापचय पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं. इससे उनके शरीर में ऊर्जा का स्तर बना रहता है. जई का चारा सुपाच्य होने के कारण पशुओं के लिए बेहद लाभकारी है. यदि इस समय उन्हें पर्याप्त हरा चारा नहीं मिलता, तो उनकी दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है.

लू से पहले चारे का सही प्रबंधन जरूरी
कौशल किशोर यादव ने अन्य पशुपालकों को सलाह दी है कि अप्रैल के अंत तक लू और भीषण गर्मी शुरू हो जाती है, जिससे जई का चारा सूखने लगता है और उसकी पौष्टिकता कम हो जाती है. इसलिए इसे खिलाने का यही सबसे उपयुक्त समय है. उन्होंने बताया कि चारे की बर्बादी रोकने के लिए इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सूखे भूसे के साथ मिलाकर खिलाना चाहिए. इससे पशुओं को संतुलित आहार मिलता है और उनका वजन भी संतुलित बना रहता है.

गर्मी से पहले पशुओं को करें तैयार
जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या बढ़ सकती है. ऐसे में जई जैसा खनिज युक्त चारा उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. अप्रैल के बाद जब हरा चारा कम हो जाता है, तब इस समय दिया गया पोषण पशुओं की सेहत में सहायक साबित होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि पशुपालकों को जई के इस अंतिम सीजन का पूरा लाभ उठाना चाहिए और वैज्ञानिक तरीके से डेयरी प्रबंधन करना चाहिए. अभी दिया गया पौष्टिक चारा आने वाले महीनों में दुग्ध उत्पादन में गिरावट को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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