तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर पहले सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है. यहां एक और एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने के करीब है, वहीं दूसरी ओर डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) में सहयोगी दलों के बीच सीटों को लेकर असहमति खुलकर सामने आ रही है. तमिलनाडु के इन दोनों प्रमुख गठबंधनों के भीतर जारी यह खींचतान चुनावी रणनीति और शक्ति संतुलन को लेकर गहरी राजनीतिक जंग का संकेत दे रही है.
एनडीए में सीट बंटवारे का फॉर्मूला
तमिल चुनाव की महाभारत से तुलना
रिपोर्ट के मुताबिक, दिनाकरण ने इस गठबंधन की तुलना महाभारत के ‘पांच पांडवों’ से करते हुए इसे ‘पंजा पांडवर अनी’ बताया, जो डीएमके के ‘दुर्योधन’ के खिलाफ चुनावी लड़ाई लड़ रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी बातचीत में सीट बंटवारे या निर्वाचन क्षेत्रों पर चर्चा नहीं हुई. इस बैठक में पीयूष गोयल भी मौजूद थे.
दिनाकरण का यह दिल्ली दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब एआईएडीएमके महासचिव ई. पलानीस्वामी ने हाल ही में अमित शाह से मुलाकात की थी. वहीं पीएमके नेता और सांसद अंबुमणि रामदौस भी दिल्ली में मौजूद हैं. दिनाकरन ने कहा कि एनडीए के सभी सहयोगी दल जल्द ही चेन्नई में बैठक कर सीट बंटवारे को अंतिम रूप देंगे और यह प्रक्रिया दो-तीन दिनों में पूरी हो सकती है.
सीट बंटवारे में उलझी डीएमके
दूसरी ओर, डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर स्थिति उलझती नजर आ रही है. गठबंधन के छोटे सहयोगी टीवीके ने सीट आवंटन को लेकर असंतोष जताते हुए गठबंधन छोड़ने का फैसला किया है. पार्टी प्रमुख टी वेलमुरुगम ने कम से कम दो सीटों की मांग की थी, जबकि डीएमके ने उन्हें केवल एक सीट की पेशकश की थी.
इसके अलावा, सीपीएम भी सीटों की संख्या को लेकर अपनी मांग पर अड़ी हुई है. पार्टी की राज्य समिति की बैठक देर शाम तक चली, लेकिन इस बात पर फैसला नहीं हो सका कि वह डीएमके के प्रस्ताव को स्वीकार करेगी या गठबंधन से बाहर हो जाएगी. सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर इस बात पर भी चर्चा हुई कि अगर वह गठबंधन छोड़ती है तो उसके राजनीतिक परिणाम क्या होंगे, खासकर तब जब वह राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी इंडिया ब्लॉक का हिस्सा है.
सहयोगी दलों को कितनी सीटें दे चुकी डीएमके?
डीएमके अब तक अपने सहयोगियों को कुल 43 सीटें आवंटित कर चुकी है. इनमें कांग्रेस को 28 सीटें दी गई हैं, जबकि सीपीआई को 5, एमडीएमके को 4 और आईयूएमएल, केएमडीके और एमएमके मानिथनेया मक्कल काची को दो-दो सीटें दी गई हैं.
इस बीच, डीएमके और वीसीके के बीच भी सीटों को लेकर समझौते की स्थिति बनती दिख रही है. वीसीके प्रमुख ठोल थिरुवमालवन ने अपनी 10 सीटों की मांग में कटौती करने पर सहमति जताई है और अब पार्टी 7 या 8 सीटों पर संतुष्ट हो सकती है.
कुल मिलाकर, तमिलनाडु की राजनीति इस समय पूरी तरह गठबंधनों के गणित और रणनीति के इर्द-गिर्द घूम रही है. जहां एनडीए गठबंधन तेजी से एकजुटता दिखाते हुए सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने की दिशा में बढ़ रहा है, वहीं डीएमके खेमे में सहयोगी दलों के बीच असंतोष और खींचतान उसके लिए चुनौती बनती जा रही है. आने वाले कुछ दिनों में दोनों गठबंधनों के भीतर होने वाले फैसले न सिर्फ उम्मीदवारों की तस्वीर साफ करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि चुनावी मुकाबला कितना कड़ा और दिलचस्प होने वाला है.



