ईरान के बंदरगाह शहर बंदर अंजली पर हुए अमेरिकी-इजरायली मिसाइल हमले ने भारत-रूस के बीच 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को बड़ा झटका दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले से INSTC की विश्वसनीयता और लागत दोनों प्रभावित होंगी, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अनिश्चितता बढ़ गई है. करीब 7200 किलोमीटर लंबा INSTC मुंबई को सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ता है और स्वेज नहर को बाईपास करते हुए एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को तेज और सस्ता बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था. यह कॉरिडोर ईरान के रास्ते मल्टी-मोडल नेटवर्क (समुद्र, रेल और सड़क) के जरिए माल ढुलाई को 25-30 दिनों से घटाकर करीब 7 दिन तक ले आता है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 18 मार्च को हुए हमले में बंदर अंजली के कस्टम हाउस समेत कई अहम ढांचों को नुकसान पहुंचा. कैस्पियन सागर के तट पर स्थित यह बंदरगाह रूस-ईरान व्यापार के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब माना जाता है.
बंदर-ए-अंजली ईरान के प्रमुख पोर्ट सिटी में से एक है. (फाइल फोटो/Reuters)
कई देशों पर असर
मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ प्रोफेसर रेनात करामुर्ज़ोव ने कहा कि अब तक सुरक्षित माने जाने वाले इस रूट पर जोखिम बढ़ने से बीमा और माल ढुलाई दरों में तेज वृद्धि होगी. इससे न केवल रूस, बल्कि मध्य एशिया के वे देश भी प्रभावित होंगे जो इस कॉरिडोर के जरिए व्यापार बढ़ाने की योजना बना रहे थे. रूसी विश्लेषक सर्गेई स्ट्रोकान ने भी इस हमले को गंभीर झटका बताते हुए कहा कि INSTC भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद अहम है. उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर समय और लागत दोनों में भारी कमी लाकर व्यापार को नई गति देने वाला था, लेकिन मौजूदा हालात में इसकी व्यवहार्यता पर सवाल खड़े हो गए हैं. इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत कर खाड़ी क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की. उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
अहम बैठक
रूस-इंडिया रिलेशंस काउंसिल के इवान तिमोफीव के अनुसार, इस हमले के प्रभाव और INSTC की भविष्य की रणनीति पर चर्चा के लिए मॉस्को में विशेषज्ञों की एक अहम बैठक आयोजित की जा रही है. ‘रूस एंड इंडिया: टुवर्ड्स ए न्यू एजेंडा फॉर बाइलेटरल रिलेशंस’ शीर्षक से होने वाले इस सम्मेलन में व्यापार, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर विचार होगा. रूस के उपप्रधानमंत्री विताली सवेलियेव ने हाल ही में बताया कि 2025 के अंत तक ट्रांस-कैस्पियन मार्ग के जरिए 7.5 मिलियन टन से अधिक कार्गो का परिवहन किया जा चुका है. उन्होंने INSTC को रूस की प्राथमिक परियोजनाओं में से एक बताते हुए इसके विकास पर जोर दिया.
वाजपेयी सरकार के समय अहम करार
हालांकि, हमले के बाद रूस ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने इसे गैर-जिम्मेदाराना कदम बताते हुए चेतावनी दी कि इससे संघर्ष का दायरा बढ़ सकता है और कैस्पियन क्षेत्र के देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. गौरतलब है कि भारत, ईरान और रूस ने वर्ष 2000 में इस बहुपक्षीय INSTC समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. बाद में कई अन्य देशों ने भी इस परियोजना में भागीदारी दिखाई. दिसंबर 2025 में व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी इस कॉरिडोर को मजबूत बनाने पर सहमति बनी थी. विशेषज्ञों का मानना है कि बंदर अंजली पर हमला केवल एक सैन्य घटना नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार मार्गों और भू-राजनीतिक संतुलन पर दूरगामी असर डालने वाला घटनाक्रम है. यदि क्षेत्र में तनाव बना रहता है, तो INSTC जैसे वैकल्पिक व्यापार मार्गों की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा, जिससे भारत-रूस के व्यापारिक लक्ष्यों को हासिल करना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है.




