Last Updated:
Iran-Israel War Impact : भारतीय नौसेना में 3 अप्रैल को शामिल होने जा रहा है स्वदेश में बने स्टील का किला ‘तारागिरि युद्धपोत’. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर भारतीय नेवी ने ईरान-इजरायल युद्ध के बीच समंदर में इसे उतारने का अभी क्यों लिया फैसला? यह युद्धपोत वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) से लैस है, जिसके जरिए यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ दाग सकता है. ब्रह्मोस लोडेड इस युद्धपोत से क्या भारत चीन और पाकिस्तान को कारारा जवाब देगा?
तारागिरि की घातक मारक क्षमता पाकिस्तान को बैकफुट पर धकेलने के लिए काफी है.
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में चीन लगातार अपने जहाजों और जासूसी पनडुब्बियों को भेज रहा है. पाकिस्तान भी चीन की मदद से अपनी नौसेना का आधुनिकीकरण करने की कोशिश में है. ऐसे में तारागिरि का आना भारत के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा. जानकारों की मानें तो चीन हिंद महासागर में भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है. तारागिरि विशाखापत्तनम में पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) का हिस्सा बनकर बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य तक चीन की हर हरकत पर पैनी नजर रखेगा.
अरब सागर और हिंद महासागर में पाकिस्तान की नौसेना भारत के मुकाबले कहीं नहीं टिकती. तारागिरि की घातक मारक क्षमता पाकिस्तान को बैकफुट पर धकेलने के लिए काफी है. यदि चीन और पाकिस्तान मिलकर समुद्र में कोई दुस्साहस करते हैं, तो तारागिरि जैसे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट भारत को एक साथ कई मोर्चों पर बढ़त दिलाएंगे.
LAUNCH OF YD 12653 (TARAGIRI)
The fifth Stealth Frigate of P17A, being built at MDL was launched today by President NWWA (Western Region)




