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Women Reservation Bill: केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए पूरी तैयारी में है. सरकार ने 50+33 का एक मास्टर फॉर्मूला तैयार किया है. लोकसभा की कुल सीटों में 50% की बढ़ाने की तैयारी है. फिर बढ़ी हुई कुल सीटों में से 33% महिलाओं के लिए आरक्षित यानी कि 181 सीट रिजर्व होंगी. 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होगा, जिससे लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर लगभग 816 हो जाएंगी और 273 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी. सरकार इसी संसद सत्र में यह अहम संशोधन बिल पेश करने जा रही है.
एक तिहाई यानी करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी
Women’s Reservation Bill: भारतीय राजनीति और संसदीय इतिहास में ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को पूरी तरह से जमीन पर उतारने की तैयारी कर ली है. संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने एक बेहद खास 50+33 का फॉर्मूला तैयार किया है. सूत्रों के मुताबिक, इसी चालू संसद सत्र में इस अहम संशोधन बिल को पेश किया जाएगा.
क्या है सरकार का ’50+33′ का नया फॉर्मूला?
- इस नए संशोधन बिल का सबसे अहम और दिलचस्प हिस्सा इसका 50+33 फॉर्मूला है.
- सबसे पहले परिसीमन के जरिए लोकसभा की मौजूदा सीटों में 50 प्रतिशत की भारी वृद्धि की जाएगी.
- इसके बाद, जो नई कुल सीटें बनेंगी, उनमें से 33 प्रतिशत सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित (Reserve) कर दी जाएंगी.
816 होंगे लोकसभा सांसद, 273 सीटें महिलाओं के लिए
वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं. नए प्रस्ताव के तहत 50% वृद्धि के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 816 हो जाएगी. इन 816 सीटों में से एक तिहाई यानी करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए अब अगली जनगणना का इंतजार नहीं किया जाएगा, बल्कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. साल 2029 का लोकसभा चुनाव पूरी तरह से इसी नए बिल और नई परिसीमन व्यवस्था के आधार पर लड़ा जाएगा.
विपक्ष को साधने में जुटे अमित शाह
सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है कि वह इस मामले में अब और देरी नहीं करना चाहती. हाल ही में संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2029 तक महिला आरक्षण को हर हाल में लागू करने के अपने विजन पर जोर दिया था. इसी रणनीति के तहत सरकार मौजूदा संसद सत्र में ही इस संशोधित कानून को पटल पर रखने जा रही है.
जहां तक विपक्ष के स्टैंड की बात है, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद इस मोर्चे को संभाल लिया है. सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने विपक्ष के कई बड़े नेताओं को इस प्रस्तावित रोडमैप की जानकारी दी है. विपक्ष सैद्धांतिक तौर पर महिला आरक्षण का समर्थन करता रहा है, लेकिन सीटों के बंटवारे और परिसीमन को लेकर सर्वसम्मति बनाने के लिए बातचीत का दौर जारी है.
लॉटरी सिस्टम से तय होंगी महिला सीटें
परिसीमन की इस विशाल प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए ‘परिसीमन अधिनियम’ सहित मौजूदा कानूनों में अहम बदलाव किए जाएंगे. अधिकारियों के अनुसार, यह तय करने के लिए कि कौन सी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी, ‘ड्रॉ ऑफ लॉट्स’ (लॉटरी सिस्टम) का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे रोटेशन और निष्पक्षता बनी रहेगी. हालांकि, सिक्किम जैसे कुछ छोटे राज्यों में इस नए ढांचे के तहत कोई बदलाव न होने की संभावना है.
अगर यह बिल संसद के दोनों सदनों से पास होकर कानूनी रूप ले लेता है, तो यह दशकों में भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली का सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव होगा, जो 2029 में देश को 273 महिला सांसद देगा.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें




