मकानों तक पहुंची ईरान-इजराइल युद्ध की आंच, मुंबई के बाद दिल्‍ली-एनसीआर में भी घर बनाना महंगा, बढ़ने वाले हैं दाम

Date:


Last Updated:

Real Estate Cost Pressure : ईरान संकट का असर अब रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में भी दिखना शुरू हो गया है, जहां स्‍टील की कीमतों में उछाल आने की वजह से मकान का निर्माण महंगा हो गया है. खासकर हाईराइज और लग्‍जरी मकानों के निर्माण पर इसका असर जल्‍दी दिखना शुरू हो गया है. एनरॉक की मानें तो निर्माण की लागत में 50 से 60 रुपये प्रति वर्गफुट की बढ़ोतरी देखी जा सकती है.

Zoom

ईरान संकट की वजह से हाईराइज बिल्डिंग की कीमत बढ़ती जा रही है.

नई दिल्‍ली. ईरान, इराइल और अमेरिका ने युद्ध क्‍या छेड़ा भारत सहित पूरा एशिया संकट में फंस गया है. तेल और गैस के बाद अब रियल एस्‍टेट तक युद्ध की आंच पहुंच गई है. मुंबई सहित दिल्‍ली-एनसीआर के तमाम डेवलपर्स का कहना है कि युद्ध की वजह से स्‍टील की कीमतें बढ़ गई हैं और अब इसका असर मकान निर्माण पर भी दिखना शुरू हो गया है. मुंबई में तो पहले ही निर्माण महंगा हो चुका है, अब इसकी आंच दिल्‍ली-एनसीआर में भी महसूस की जाने लगी है. खासकर हाईराइज और लग्‍जरी हाउसिंग सेग्‍मेंट पर जल्‍दी असर दिखना शुरू हो गया है.

प्रॉपर्टी परामर्श फर्म एनारॉक के अनुसार, स्टील की कीमतों में लगभग 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह करीब 72,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है. इसका कारण सप्लाई में बाधा, बढ़ती शिपिंग लागत और युद्ध से जुड़ी लॉजिस्टिक चुनौतियां हैं. इस तेज बढ़ोतरी का असर देश के बड़े शहरों में मकान निर्माण लागत पर साफ दिख रहा है. भारत के सबसे बड़े हाई-राइज मार्केट मुंबई में सिर्फ स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी से निर्माण लागत में लगभग 50 रुपये प्रति वर्गफुट का इजाफा हो रहा है. इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर और बैंगलुरु जैसे अन्य प्रमुख माइक्रो-मार्केट्स में भी डेवलपर्स को इसी तरह की लागत बढ़ने का दबाव झेलना पड़ सकता है.

हाईराइज बिल्डिंग पर ज्‍यादा असर क्‍यों
हाईराइज निर्माण में स्टील का बड़ा हिस्सा होता है, जिससे यह ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति सबसे संवेदनशील इनपुट्स में से एक है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा बढ़ोतरी मुख्य रूप से सप्लाई चेन में बाधा, बढ़ती फ्रेट लागत और ऊर्जा से जुड़ी महंगाई के कारण हो रही है, जिसे भू-राजनीतिक तनाव ने और बढ़ा दिया है. एनारॉक ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और हेड रिसर्च एंड एडवाइजरी प्रशांत ठाकुर का कहना है कि मार्च 2026 की शुरुआत से स्ट्रेट ऑफ होरमुज बंद होने से रियल एस्‍टेट सेक्टर को भारी नुकसान हुआ है, जिसमें सामग्री की लागत बढ़ी है. सप्लाई में देरी हो रही है और कई प्रोजेक्ट्स में देरी या रुकावट भी आ सकती है.

मुंबई पर सबसे ज्‍यादा दिखा असर
एनारॉक के अनुमान के मुताबिक, मुंबई में ऊंची इमारतों के निर्माण की लागत में 50 रुपये प्रतिवर्ग फुट की बढ़ोतरी हो गई है. शहर में अभी करीब 10,000 से ज्यादा लग्जरी यूनिट्स का निर्माण चल रहा है. गगनचुंबी इमारतों में कंक्रीट के अंदर रिब्ड स्टील रॉड्स का इस्तेमाल किया जाता है ताकि उसे मजबूती मिल सके और यह अतिरिक्त खर्च सीधे तौर पर निर्माण लागत और रफ्तार पर असर डालता है. निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाला डीजल, खासकर क्रेन और मिक्सर के लिए ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर से ऊपर के दाम से जुड़ा हुआ है. इस कीमत में आई तेजी का असर मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद सहित कई शहरों में दिख रहा है.

इन कारणों से भी बढ़ी कीमत
एनारॉक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हॉट रोल्ड कॉइल की कीमत अब 51,000 से 56,000 रुपये प्रति टन के आसपास है और अगर हालात नहीं सुधरे तो जून तक यह 62,000 रुपये तक पहुंच सकती है. यह दबाव अब दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु जैसे ऊंची इमारतों वाले बाजारों में भी महसूस किया जा रहा है. दिल्ली-एनसीआर में जहां गुरुग्राम और नोएडा जैसे इलाकों में लग्जरी और ऊंची इमारतों का बोलबाला है तो वहां भी निर्माण लागत में 40 से 60 रुपये प्रति वर्गफुट तक की बढ़ोतरी हो सकती है. जिन प्रोजेक्ट्स में स्टील की खपत ज्यादा है, उनमें यह बढ़ोतरी और तेज हो सकती है. बैंगलुरु में यह बढ़ोतरी 30 से 50 रुपये प्रति वर्गफुट होने की आशंका है.

About the Author

authorimg

Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related