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आपके घर के नल का पानी हो या साबुन-शैंपू में खतरनाक केमिकल हो. अब इनको आसानी से हटाया जा सकता है. ‘फॉरएवर केमिकल’ हटाने का नया तरीका ढूंढ़ लिया है. यह केमिकल रोजमर्रा की चीजों जैसे शैम्पू, डिटर्जेंट, साबुन और यहां तक कि नल के पानी में भी पाया जाता है.
हालांकि अभी स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की जांच बाकी है.
बेंगलुरु. आपके घर के नल का पानी हो या साबुन-शैंपू में खतरनाक केमिकल हो. अब इनको आसानी से हटाया जा सकता है. ‘फॉरएवर केमिकल’ हटाने का नया तरीका ढूंढ़ लिया है. यह केमिकल रोजमर्रा की चीजों जैसे शैम्पू, डिटर्जेंट, साबुन और यहां तक कि नल के पानी में भी पाया जाता है, जिसका नाम 1,4-डायऑक्सेन है. यह पानी में इतना घुल जाता है कि सामान्य पानी प्रोसेस से हटाया नहीं जा सकता है. अब भारतीय और स्विस वैज्ञानिकों की टीम ने एक आसान समाधान निकाला है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसर अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने इसे ‘संभावित कैंसर पैदा करने वाला’ केमिकल बताया है. यह औद्योगिक कचरे से भूजल में मिल जाता है. इसे न सूरज की रोशनी, न बैक्टीरिया और न ही शुद्धिकरण तकनीक से इसे हटाया जा सकता है. दुनिया भर के पीने के पानी में इसका पता चला है. पहले इसे हटाने का एकमात्र तरीका दूषित पानी को जलाना था, जो बहुत महंगा और पर्यावरण के लिए हानिकारक था.
शिव नादर इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (भारत) और स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ अप्लाइड साइंसेज एंड आर्ट्स की टीम ने एक ने तरीका ढूंढा है. उन्होंने केमिकल को पूरी तरह नष्ट करने की बजाय उसे बदल दिया. उन्होंने नीली एलईडी लाइट का इस्तेमाल करके एक रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू की. इस प्रतिक्रिया से 1,4-डायऑक्सेन का अणु बदल जाता है और वह 1,4-डायऑक्सेपेन नाम के नए पदार्थ में बदल जाता है.
नया पदार्थ पानी में आसानी से नहीं घुलता. यह तेल की तरह पानी के ऊपर तैरने लगता है, जिसे आसानी से अलग किया जा सकता है. यह पूरी प्रक्रिया एक छोटे-से फ्लो रिएक्टर में होती है. यह रिएक्टर हथेली के आकार का 3डी प्रिंटेड उपकरण है. इसमें कुछ मिलीमीटर चौड़ी नलियां हैं. दूषित पानी और प्रकाश-संवेदनशील रसायन एक साथ इन नलियों से गुजरते हैं और नीली एलईडी लाइट उन्हें रोशन करती है. वास्तविक परिस्थितियों में इससे 93 प्रतिशत से ज्यादा प्रदूषक को बदला जा सका.
इस प्रक्रिया में टोल्यूइन नाम का खतरनाक सॉल्वेंट इस्तेमाल होता है. साथ ही, बने नए पदार्थ की लंबे समय तक पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर की जांच अभी बाकी है. अगर सफल रहा तो यह दुनिया भर के शहरों के पानी शुद्धिकरण प्लांट में क्रांति ला सकता है. आम लोगों को साफ और सुरक्षित पीने का पानी मिलना आसान हो जाएगा.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें




