भरतपुर का ये गांव बना ‘नो नेटवर्क जोन’! 3 हजार आबादी फिर भी मोबाइल नेटवर्क नहीं, कई किलोमीटर तक सिग्नल गायब

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Bharatpur Hathori Village Network Issue: भरतपुर का हथौड़ी गांव आज भी डिजिटल सुविधाओं से पूरी तरह वंचित है. करीब 3 हजार की आबादी वाले इस गांव में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. ग्रामीणों को कॉल करने या इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. देश जहां 5G और डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है, वहीं यह गांव अब भी नेटवर्क की समस्या से जूझ रहा है. यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल खाई को उजागर करती है और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल खड़े करती है.

भरतपुर के हथौड़ी गांव आज भी डिजिटल युग में बुनियादी संचार सुविधाओं से वंचित है. देश जहां डिजिटल इंडिया और 5जी नेटवर्क की ओर तेजी से बढ़ रहा है. वहीं यह गांव अब भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. करीब तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में कई किलोमीटर तक मोबाइल सिग्नल नहीं मिलता जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण लोगों को फोन पर बात करने के लिए या तो कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है या फिर पहाड़ पर बने मंदिर तक चढ़ना पड़ता है. यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है. बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में बेहद खतरनाक भी साबित होती है. किसी की तबीयत अचानक बिगड़ने दुर्घटना होने या अन्य जरूरी स्थिति में समय पर सूचना नहीं पहुंच पाती जिससे इलाज में देरी होती है.

और जान का खतरा बढ़ जाता है. कई बार ग्रामीणों को सूचना देने के लिए 8 से 10 किलोमीटर दूर वैर कस्बे तक जाना पड़ता है. इस समस्या से निपटने के लिए ग्रामीणों ने एक अनोखा तरीका अपनाया हुआ है. पहाड़ी पर स्थित हनुमान मंदिर में रहने वाले महंत रामसेवक दास, जिन्हें टुंडा बाबा के नाम से भी जाना जाता है, गांव के लिए संचार का माध्यम बने हुए हैं. गांव के लोग अपने रिश्तेदारों और परिचितों को महंत का मोबाइल नंबर दे देते हैं. जब किसी का फोन आता है.

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तो महंत मंदिर में लगे माइक से संबंधित व्यक्ति का नाम लेकर उसे सूचना देते हैं. जरूरत पड़ने पर लोग मंदिर पहुंचकर फोन पर बातचीत करते हैं. नेटवर्क के अभाव का असर शिक्षा और सरकारी कामकाज पर भी साफ देखा जा रहा है. गांव के विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित हैं और उन्हें जानकारी के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है. वहीं स्कूल के शिक्षक भी ऑनलाइन रिपोर्ट और अन्य कार्यों के लिए गांव से बाहर जाने को मजबूर हैं.

जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है. इसके अलावा बैंकिंग सेवाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों को सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है. गांव के लोगों ने बताया कि डिजिटल युग में भी उनका गांव बुनियादी सुविधाओं से पीछे है. उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या के बारे में अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. मोबाइल कंपनियां टॉवर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि उन्हें जमीन से संबंधित औपचारिकताओं में दिक्कत नजर आती है.

जबकि गांव के किसान अपनी निजी भूमि टॉवर लगाने के लिए देने को तैयार हैं. ग्रामीणों का कहना है.कि नेटवर्क की कमी के कारण न केवल संचार व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि उनकी सुरक्षा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है.कि जल्द से जल्द गांव में मोबाइल टॉवर स्थापित किया जाए ताकि वे भी डिजिटल भारत की मुख्यधारा से जुड़ सकें और उनकी मूलभूत समस्याओं का समाधान हो सके.



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