Last Updated:
भारत ने उन सभी दावों को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाजों को निकालने के लिए ईरान की अनुमति ली जा रही है. सरकार ने कहा, ऐसी किसी अनुमति की जरूरत नहीं है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आज भ्ज्ञी एक जहाज निकलकर आया है.
अभी तक कहा जा रहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपने जहाजों को निकालने के लिए भारत ईरान के साथ बातचीत कर रहा है. कुछ दावों में तो ये भी कहा जा रहा है कि ईरान भारतीय जहाजों को अनुमति दे रहा है, तभी जहाज वहां से निकल रहे हैं. अब भारत सरकार ने साफ साफ कहा है कि होर्मुज से जहाज निकालने के लिए कभी किसी मंजूरी की जरूरत नहीं थी. आज भी नहीं है. न हमने कभी किसी से मंजूरी ली और ना ही अब ले रहे हैं.
शिपिंग मंत्रालय ने उन दावों को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि भारतीय जहाज ईरान को लेवी यानी पैसे देकर गुजर रहे हैं. सरकार ने कहा, अंतराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए कोई लेवी नहीं ली जा सकती. स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से गुजरने के लिए लेवी लेने की खबरें निराधार हैं.
होर्मुज पर क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून?
- होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला संकरा समुद्री मार्ग है. चूंकि यह वर्ल्ड ट्रेड और ऑयल सप्लाई के लिए जरूरी रास्ता है, इसलिए इसे कानूनी तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है. इस पर यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन ऑन द लॉ एंड सी लागू होता है.
- यह कानून कहता है कि होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले सभी देशों के जहाजों और विमानों को ‘ट्रांजिट पैसेज’ यानी बिना किसी रोकटोक के जाने काअधिकार है. कोई इन्हें नहीं रोक सकता.
- अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, किसी भी देश के जहाज को इस अंतरराष्ट्रीय मार्ग से गुजरने के लिए तटीय देशों (इस मामले में ईरान या ओमान) से किसी भी प्रकार की परमिशन लेने या उन्हें सूचना देने की कोई जरूरत नहीं है.
- कानून का आर्टिकल 44 कहता है कि तटीय देश ‘ट्रांजिट पैसेज’ में कोई बाधा नहीं डालेंगे. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अधिकार को किसी भी परिस्थिति में सस्पेंड नहीं किया जा सकता.
- सामान्य समुद्री सीमाओं में ‘इनोसेंट पैसेज’ का नियम लागू होता है, जिसे तटीय देश सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से रोक सकते हैं. लेकिन होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय मार्ग में अधिक शक्तिशाली ट्रांजिट पैसेज लागू होता है, जिसे रोकना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.
- ईरान और अमेरिका जैसे कुछ देशों ने UNCLOS संधि की पूरी तरह से पुष्टि नहीं की है, फिर भी ट्रांजिट पैसेज के नियम को बाध्यकारी कानून माना जाता है. मतलब, यह नियम इतने लंबे समय से सर्वमान्य है कि यह उन देशों पर भी बाध्यकारी है जिन्होंने संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
- ईरान अक्सर दावा करता है कि वह होर्मुज को कंट्रोल कर सकता है या केवल उन देशों को बिना अनुमति जाने दे सकता है जिन्होंने UNCLOS पर हस्ताक्षर किए हैं. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और कानून इस बात को खारिज करते हैं; किसी भी एक देश को वैश्विक व्यापार के इस मुख्य रास्ते को मनमाने ढंग से बंद करने का अधिकार नहीं है.
- बिना अनुमति गुजरने की छूट का अर्थ मनमानी नहीं है. जहाजों को इस मार्ग से बिना किसी देरी के ‘निरंतर और तेजी से’ गुजरना होता है, उन्हें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है, और वे तटीय देशों के खिलाफ किसी भी तरह के बल प्रयोग या धमकी का इस्तेमाल नहीं कर सकते.
About the Author
Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



