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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता की पहल करने के ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर अहम चर्चा की है. पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से ये पहला मौका है जब ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ संपर्क साधा है. इससे पहले दोनों के बीच फरवरी की शुरुआत में बातचीत हुई थी. आज की इस हाई-प्रोफाइल कॉल में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने पर खास जोर दिया गया.
ईरान के साथ सीजफायर के बाद पीएम मोदी र ट्रंप के बीच हुई बात
नई दिल्ली: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ ऐतिहासिक ‘सीजफायर’ और बातचीत की पहल करने के तुरंत बाद भारत का रुख किया है. ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन घुमाया है और यह कॉल कई मायनों में बेहद खास है. ईरान के साथ जंग शुरू होने से लेकर अब तक के पूरे घटनाक्रम में यह पहली बार है जब ट्रंप ने सीधे पीएम मोदी से संपर्क साधा है. इससे पहले दोनों नेताओं के बीच फरवरी की शुरुआत में उस ऐतिहासिक ‘ट्रेड डील’ को लेकर बातचीत हुई थी. आज हुई बातचीत में वेस्ट एशिया क्राइसेस और होर्मुज को लेकर चर्चा हुई है.
होर्मुज पर ‘हाई-लेवल’ मंथन
आज हुई इस फोन कॉल का सबसे बड़ा एजेंडा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) रहा. दोनों देशों की तरफ से इस रास्ते को बिना रुकावट खुला रखने की अहमियत पर जोर दिया गया. ये वो समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है और इसी होर्मुज पर चोकहोल्ड बनाकर ईरान दुनिया भर की सप्लाई रोक रहा है. ट्रंप जानते हैं कि अगर ईरान के साथ सीजफायर को सफल बनाना है और तेल की ग्लोबल सप्लाई सुरक्षित रखनी है, तो भारत की भूमिका सबसे अहम है. ट्रंप की इस पहल से साफ है कि वे पश्चिम एशिया के संकट को सुलझाने के लिए भारत को एक भरोसेमंद ‘मध्यस्थ’ के रूप में देख रहे हैं.
ये कॉल तब हुई है जब महज 24 घंटे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच लंबी चर्चा हुई थी. माना जा रहा है कि रूबियो और जयशंकर ने ही इस ‘बॉस लेवल’ की बातचीत का ग्राउंड तैयार किया था.
फरवरी के बाद पहली बार पीएम मोदी-ट्रंप की बातचीत
फरवरी की शुरुआत में हुई बातचीत के बाद से मिडिल ईस्ट में काफी खून बह चुका है. उस समय चर्चा व्यापार और टैरिफ पर थी, लेकिन आज की चर्चा ‘ग्लोबल पीस’ और ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ पर केंद्रित रही. ट्रंप ने पीएम मोदी को ईरान के साथ अपनी शुरुआती बातचीत का ब्योरा दिया और हो सकता है कि इस मामले में भारत के प्रभाव का इस्तेमाल करने की गुजारिश की है.
अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होता है, तो भारत की इकोनॉमी पर भी सीधा असर पड़ेगा. ऐसे में मोदी-ट्रंप की यह जुगलबंदी वैश्विक बाजार के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है.
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Utkarsha Shrivastava is a seasoned digital journalist specializing in geo-politics, currently writing for World section of News18 Hindi. With over 10 years of extensive experience in digital media, she has buil…और पढ़ें





