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RVNL-Ircon Merger : रेल मंत्रालय के प्रस्ताव पर सरकार ने भी करीब-करीब हामी भर दी है और अब जल्द ही रेलवे की दो इन्फ्रा कंपनियों आरवीएनएल और इरकॉन इंटरनेशनल के विलय पर काम शुरू हो जाएगा. सरकार की मंशा है कि इन दोनों कंपनियों को मिलाकर एक मजबूत और बड़ी कंपनी बनाई जाए, जो ग्लोबल मार्केट में चीन और यूरोप की कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सके.
सरकार ने आरवीएनएल और इरकॉन के विलय का प्लान बनाया है.
नई दिल्ली. सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की 2 कंपनियों के विलय का पूरा मन बना लिया है. यह दोनों ही कंपनियां रेलवे की हैं और इन्हें मिलाकर एक बड़ी कंपनी बनाई जाएगी, जो ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगी. अभी दोनों कंपनियां रेलवे की इन्फ्रा परियोजनाओं के लिए काम करती हैं और मर्जर के बाद इन्हें ग्लोबल मार्केट में भी उतारा जा सकता है. रेलवे ने इनके विलय का प्रस्ताव दिया था, जिस पर अब सरकार ने भी लगभग मुहर लगा दी है.
रेल मंत्रालय ने मार्च की शुरुआत में रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और इरकॉन इंटरनेशनल के विलय का प्रस्ताव दिया था. इसके बाद से ही दोनों कंपनियों के शेयरों में तेजी दिख रही है. अभी तक इनके स्टॉक 12 फीसदी तक उछाल प्राप्त कर चुके हैं. मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव को आगे बढ़ागी. यही वजह है कि फिलहाल इरकॉन इंटरनेशनल के चेयरमैन और प्रबंधन निदेशक की नियुक्ति भी टाल दी गई है.
क्या है इस विलय का मकसद
रेल मंत्रालय का कहना है कि दोनों कंपनियों को मिलाकर एक बड़ी इकाई बनाई जाएगी, जो ग्लोबल मार्केट में भी प्रतिस्पर्धा कर सकेगी. दोनों कंपनियों कामकाज की प्रकृति भी लगभग समान है, क्योंकि दोनों ही रेलवे के लिए इन्फ्रा प्रोजेक्ट पर काम करती हैं. अभी दोनों कंपनियां निर्माण, कॉन्ट्रैक्ट, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, हाईवे, मेट्रो आदि से जुड़े काम करती हैं. चूंकि, दोनों ही कंपनियों का कामकाज समान है तो इसमें डुप्लीकेसी भी होती है. दोनों मिलाकर एक कंपनी बनाने से यह सारे काम बेहतर तरीके से किए जा सकेंगे. इतना ही नहीं, अभी देश में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसी कई बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. इसमें भी दोनों कंपनियां अलग-अलग काम कर रही हैं, जो मर्जर के बाद मिलकर ज्यादा प्रभावी तरीके से काम कर सकेंगी.
क्या होगा विलय से फायदा
एक बड़ी कंपनी के पास बड़ा बैलेंस शीट और ज्यादा मैनपॉवर होती है, जिससे वह बड़े प्रोजेक्ट को भी आसानी से हैंडल कर सकती है. सरकार भी चाहती है कि एक बड़ी भारतीय रेलवे कंपनी ग्लोबल मार्केट में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकती है. अगर रेलवे की बड़ी कंपनी होगी तो चीन और यूरोप की कंपनियों को विदेशी टेंडर जीतने में टक्कर दे सकेगी. अभी दोनों कंपनियां अलग-अलग रहकर इन देशों की बड़ी कंपनियों के मुकाबले छोटी पड़ जाती हैं. कुल मिलाकर सरकार ने जैसे बैंकों का विलय करके बड़े बैंक बनाए हैं, उसी तरह सरकारी कंपनियों का आकार भी बड़ा व मजबूत बनाने की तैयारी में है. वैसे तो इस पूरे काम में एक से 2 साल का समय लग सकता है, लेकिन एक बार काम पूरा हुआ तो देश को निश्चित रूप से इससे फायदा होगा.
विलय की खबर से उछल रहे शेयर
दोनों रेलवे कंपनियों के विलय में भले ही समय लगने वाला है, लेकिन निवेशकों को इसका फायदा अभी से मिलना शुरू हो गया है. विलय की खबरों से आरवीएनएल के शेयरों में आज यानी 25 मार्च को करीब 5 फीसदी का उछाल दिख रहा है और 12.85 रुपये तेजी के साथ 271.30 रुपये के भाव पर पहुंच गए हैं. साथ ही इरकॉन इंटरनेशनल के शेयरों में भी 6.75 फीसदी का उछाल दिख रहा है और करीब 7 रुपये बढ़कर 125.74 रुपये के भाव पहुंच गया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें




