Last Updated:
Job Market Update : ईरान युद्ध और एलपीजी संकट के बीच देश की ज्यादातर बड़ी कंपनियों ने अगले 6 महीने में भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है. टीमलीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नए वित्तवर्ष के शुरुआती 6 महीने में तमाम बड़ी कंपनियों ने भर्ती करने की बात कही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई सेक्टर हैं, जहां रोजगार की डिमांड है.
देश का जॉब मार्केट अगले 6 महीने में बेहतर रहने की संभावना है.
नई दिल्ली. दुनिया ईरान संकट और तेल-गैस में उलझी हुई है, इस बीच आई जॉब रिपोर्ट ने चौंका दिया है. रोजगार मंच टीमलीज सर्विसेज ने देशभर में सर्वे के आधार पर यह आंकड़ा जारी किया है. इसमें बताया है कि अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तवर्ष की पहली छमाही में रोजगार का क्या हाल रहेगा. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल से सितंबर तक 6 महीने के दौरान किस सेक्टर में सबसे ज्यादा रोजगार आएंगे और किस सेक्टर में रोजगार की कमी रहेगी.
टीमलीज सर्विसेज के अनुसार, अगले 6 महीने में ई-कॉमर्स, प्रौद्योगिकी स्टार्टअप, स्वास्थ्य सेवा, दवा और विनिर्माण क्षेत्रों में वृद्धि के कारण वित्तवर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भारत में रोजगार 4.7 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है. इसमें कहा गया है कि भले ही दुनिया में ईरान संकट का असर दिख रहा है, लेकिन भर्ती को लेकर रुझान बखूबी दिख रहा है. खासकर बड़ी कंपनियों में यह रुझान सबसे अधिक दिखाई दे रहा है. सर्वे में पता चला है कि 74 फीसदी कंपनियों ने विस्तार का संकेत दिया है. इसके मुकाबले मध्यम आकार की कंपनियों में यह आंकड़ा 57 फीसदी और छोटे व्यवसायों में 38 फीसदी दिखा है. यह आंकड़ा दिखाता है कि रोजगार वृद्धि में बड़े पैमाने पर संचालित कंपनियों की भूमिका अहम है.
डिजिटल सेक्टर का कैसा रुझान
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 की अवधि में रोजगार की डिमांड में यह रुझान डिजिटल व पारंपरिक दोनों अर्थव्यवस्था क्षेत्रों में देखने को मिलेगा. इसके अलावा ई-कॉमर्स और प्रौद्योगिकी स्टार्टअप क्षेत्र में नेट एम्प्लॉयमेंट चेंज (एनईसी) 8.9 फीसदी के साथ सबसे अधिक रहेंगे. इसके बाद 7 फीसदी के साथ स्वास्थ्य सेवा और दवा क्षेत्र व 6.6 फीसदी के साथ विनिर्माण, इंजीनियरिंग और इन्फ्रा क्षेत्र का स्थान रहेगा.
रोजगार में कितनी तेजी
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अवधि में कुल एनईसी 4.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. यह रिपोर्ट 23 उद्योगों एवं 20 शहरों में 1,268 नियोक्ताओं से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है. कंपनी ने इस सर्वे को नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच कराया था. टीमलीज सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालासुब्रमण्यम ए. ने कहा कि भारत में कार्यबल की गतिशीलता अब सर्किल डिमांड की बजाय संरचनात्मक एवं नीतिगत बदलावों से अधिक प्रभावित हो रही है.
बढ़ती जा रही जॉब की लागत
रिपोर्ट में अच्छे संकेतों के साथ एक बुरी खबर भी बताई गई है. इसमें कहा गया है कि नए लेबर कानून लागू होने के बाद 64 फीसदी संगठनों ने रोजगार लागत बढ़ने की बात कही है और 80 फीसदी कंपनियां सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही हैं. ये कंपनियां नए कानूनी ढांचे के अनुरूप अपने कार्यबल मॉडल को पुनर्गठित कर रही हैं, जिससे जॉब को लेकर उनकी लागत भी बढ़ रही है. यही वजह है कि कंपनियों के रुझान के बावजूद जॉब मार्केट में सुस्ती रहने की आशंका है.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





