शिमला. हिमाचल प्रदेश में गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही सुक्खू सरकार ने तीन साल में अब तक 41,173 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जबकि 32,004 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया भी है. यह जानकारी संशोधित बजट अनुमान में दी गई है.
2026-27 के बजट में 11,965 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव है. हिमाचल सरकार पर बढ़ता कर्ज और ब्याज का बोझ, साथ ही राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से सीमित कर आधार के बीच राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है.
संक्षिप्त बजट के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में सरकार की कुल कर्ज देनदारी 1,03,994 करोड़ रुपये रही, जो 2026-27 में बढ़कर 1,12,319 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. सरकार पर कुल कर्ज 2022-23 में 76,681 करोड़ रुपये, 2023-24 में 85,295 करोड़ रुपये और 2024-25 में 93,625 करोड़ रुपये रहा, जो लगातार बढ़ता जा रहा है.
जानकारी के अनुसार, 2024-25 में ब्याज भुगतान 6,260.93 करोड़ रुपये और 2025-26 में 6,693 करोड़ रुपये रहा, जो 2026-27 में 7,271 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन ढांचे में भी ब्याज भुगतान में बढ़ोतरी का रुझान दिखाया गया है. इसे 2027-28 में 8,115 करोड़ रुपये और 2028-29 में 8,865 करोड़ रुपये आंका गया है. वहीं सब्सिडी को 2025-26 के 3,205 करोड़ रुपये से घटाकर 2026-27 में 858.98 करोड़ रुपये, 2027-28 में 910.52 करोड़ रुपये और 2028-29 में 965.15 करोड़ रुपये करने का अनुमान है.
स्थिति चिंताजनक बताई गई है क्योंकि वेतन, पेंशन, कर्ज भुगतान, ब्याज भुगतान और अन्य मदों पर सरकार का खर्च बजट का लगभग 80 प्रतिशत है. वहीं पूंजीगत कार्यों और अन्य गतिविधियों के लिए सिर्फ 20 प्रतिशत राशि ही बचती है.
कम बजट किया पेश
गौर रहे कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार कम आकार का बजट पेश किया गया. इस बार करीब चार हजार करोड़ रुपये का कम बजट पेश किया गया है. पिछली बार बजट का आकार 58 हजार करोड़ रुपये थे. गौर रहे कि भाजपा सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में करीब 30 हजार करोड़ रुपये कर्ज लिया था.




