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स्पेन के बार्सिलोना से जर्मनी के डसेलडॉर्फ के लिए टेकऑफ हई जर्मनविंग्स की फ्लाइट 9525 एक भयानक हादसे का शिकार हो गई. इस क्रैश में फ्लाइट में मौजूद सभी 144 पैसेंजर और 6 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी. जांच में पता चला कि यह क्रैश एक साजिश का हिस्सा था, जिसे प्लेन के एक पायलट ने ही अंजाम दिया था.
इस हादसे में 19 देशों को पैसेंजर्स ने अपनी जान गंवाई थी.
Germanwings Flight 9525: उस दिन स्पेन के बार्सिलोना से जर्मनी के डसेलडॉर्फ जाने वाली जर्मनविंग्स की फ्लाइट 9525 ने तय समय से 26 मिनट की देरी से उड़ान भरी. इस उड़ान के लिए एयरलाइन ने एयरबस A320-211 तैयार किया था, जिसमें अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए 144 पैसेंजर और 6 क्रू-मेंबर सवार थे. 24 मार्च 2015 को टेकऑफ के बाद फ्लाइट में सबकुछ सामान्य रहा और प्लेन क्रूज करते हुए करीब 38,000 फीट तक पहुंच गया. इस ऊंचाई पर पहुंचने के बाद फ्लाइट के कप्तान ने स्थानीय समय के अनुसार, सुबह करीब 10:30 बजे फ्रेंच एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क भी किया. लेकिन ठीक एक मिनट बाद 10:31 बजे कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया.
आखिर कॉकपिट के अंदर क्या हुआ?
- जांच में सामने आया कि जैसे ही प्लेन क्रूज कर 38000 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा, कैप्टन पैट्रिक जोंडेनहाइमर थोड़ी देर के लिए कॉकपिट से बाहर गए.
- कैप्टन पैट्रिक जोंडेनहाइमर के बाहर जाते ही को-पायलट एंड्रियास लुबिट्ज ने कॉकपिट का दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया और प्लेन के ऑटोपायलट को 100 फीट की ऊंचाई पर सेट कर दिया.
- प्लेन की ऊंचाई तेजी से गिरने लगी और प्लेन दुगनी रफ्तार से जमीन की तरफ बढ़ने लगा. प्लेन की तेजी से घटती ऊंचाई देख कैप्टन कॉकपिट की तरफ दौड़ पड़ें.
- उन्होंने दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा नहीं खुला. इंटरकॉम पर संपर्क किया, दरवाजा खटखटाया, फिर जोर-जोर से पीटना शुरू किया. लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया.
- 38,000 फीट से नीचे उतरने में प्लेन को करीब 10 मिनट लगे. औसतन 3,400 फीट प्रति मिनट की दर से प्लेन नीचे आ रहा था. यह कोई फ्री-फॉल नहीं था, बल्कि जानबूझकर किया गया डिसेंट था.
- एयरक्राफ्ट से कोई जवाब न मिलने पर फ्रांस एटीसी हरकत में आ गया. स्थिति को गंभीर मानते हुए मिराज फाइटर जेट भी भेजा गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
- करीब 10:40 बजे रडार से संपर्क टूट गया और 10:41बजे प्लेन फ्रेंच आल्प्स की पहाड़ियों से टकरा गया. प्लेन में सवार सभी पैसेंजर और क्रू की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई.
700 किमी/घंटा की रफ्तार से पहाड़ से टकराया प्लेन
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्लेन जिस वक्त पहाड़ी से टकराया, उस वक्त उसकी रफ्तार करीब 700 किमी/घंटा थी. टक्कर इतनी भीषण थी कि पूरा प्लेन मलवा करीब दो किलोमीटर के दायरे में फैल गया. प्लेन का सबसे बड़ा मलबा भी एक कार के आकार से बड़ा नहीं था. हेलीकॉप्टर से मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम को क्रैश साइट देखते ही समझ आ गया था कि वहां कोई जीवित नहीं बचा है. इस प्लेन में 19 देशों के लोग सवार थे. इनमें जर्मनी के हाल्टर्न आम जे के 16 छात्र और 2 शिक्षक भी शामिल थे, जो स्पेन से एक्सचेंज प्रोग्राम से लौट रहे थे. इसके अलावा जानी-मानी ओपेरा सिंगर मारिया रैडनर और ओलेग ब्रायजैक भी इसी फ्लाइट में थे. दो ईरानी खेल पत्रकार, एक अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़े कॉन्ट्रैक्टर और कई अन्य पैसेंजर्स की कहानी उस दिन इस क्रैश के साथ खत्म हो गई.
हादसे में किस देश के कितने नागरिकों की गई जान
| देश | नागरिकों की मौत |
| जर्मनी | 72 |
| स्पेन | 50 |
| अर्जेंटीना | 3 |
| कजाकिस्तान | 3 |
| ऑस्ट्रेलिया | 2 |
| कोलंबिया | 2 |
| ईरान | 2 |
| जापान | 2 |
| यूनाइटेड किंगडम | 2 |
| वेनेज़ुएला | 2 |
| बेल्जियम | 1 |
| डेनमार्क | 1 |
| इजराइल | 1 |
| आइवरी कोस्ट | 1 |
| मेक्सिको | 1 |
| मोरक्को | 1 |
| नीदरलैंड | 1 |
| अमेरिका | 3 |
क्या गंभीर डिप्रेशन से जूझ रहा था को-पायलट एंड्रियास लुबिट्ज?
रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 साल का एंड्रियास लुबिट्ज एक प्रशिक्षित पायलट था. उसने लुफ्थांसा के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया था और 2014 में जर्मनविंग्स को ज्वाइन किया था. जांच में पता चला कि वह पहले गंभीर डिप्रेशन से जूझ चुका था और डॉक्टर ने उसे उड़ान के लिए अयोग्य घोषित किया था. लेकिन उसने यह जानकारी अपनी एयरलाइन से छुपा ली थी. उसके घर से डॉक्टर का नोट मिला, जिसमें लिखा था कि वह काम करने के लायक नहीं है. इसके बावजूद वह ड्यूटी पर आया.
क्या एंड्रियास लुबिट्ज ने जानबूझकर ऑटोपायलट को नीचे सेट किया?
फ्रांस की बीईए और जर्मनी की बीएफयू ने मिलकर जांच शुरू की. कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर से पता चला कि एंड्रियास लुबिट्ज ने जानबूझकर ऑटोपायलट को नीचे सेट किया था. उसने पहले भी एक फ्लाइट में ऐसा करने की प्रैक्टिस की थी. उसने क्रैश से पहले आत्महत्या के तरीके और कॉकपिट डोर सिक्योरिटी के बारे में सर्च किया था. टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वह एंटीडिप्रेसेंट दवाइयां ले रहा था.
इस हादसे के बाद एविएशन इंडस्ट्री में किस तरह के बदलाव हुए?
इस हादसे के बाद एविएशन इंडस्ट्री में भूचाल गया. कॉकपिट रूल्स को लेकर की समीक्षा की जाने लगी. इस हादसे के बाद एयरलाइन नियमों में बदलाव किए गए और तय किया गया कि कॉकपिट में हमेशा दो लोगों की मौजूदगी अनिवार्य होगी. साथ ही, पायलट्स की फिजिकल और मेंटल हेल्थ को लेकर सख्त रूल्स बनाए गए.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें




